हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, महागांव की देशी शराब दुकान बंद करने का आदेश रद्द
Liquor Shop Shutdown: महागांव की देशी शराब दुकान बंद करने का जिलाधिकारी का आदेश हाईकोर्ट ने रद्द किया। मतदाता सूची में संशोधन पर सुनवाई न होने को आधार बनाया, हालांकि दुकान फिलहाल बंद ही रहेगी।
- Written By: अनन्या तिवारी
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स-AI)
Court Grants Stay On Liquor Shop Shutdown Directive: यवतमाल जिले के महागांव नगरपंचायत क्षेत्र के वसंतराव नाईक चौक स्थित देशी शराब दुकान को बंद करने के संबंध में जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेश को मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि मतदाता सूची में संशोधन करते समय संबंधित पक्षों को सुनवाई का उचित अवसर नहीं दिया गया।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि नए निर्णय होने तक यह देशी शराब दुकान बंद ही रहेगी। महागांव नगरपंचायत के वार्ड क्रमांक-1 की कुछ महिलाओं ने देशी शराब दुकान बंद करने की मांग की थी। इसके बाद राज्य आबकारी विभाग ने नियमों के तहत गुप्त मतदान कराया।
इस में कुल महिला मतदाता की संख्या 145 थी जिसमे से दुकान बंद करने के समर्थन में 69 वोट और दुकान बंद करने के विरोध में 7 वोट आए ,1 वोट अवैध घोषित किया गया।
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मतदाता सूची में संशोधन को लेकर विवाद
प्रारंभिक गणना में यह माना गया कि 145 मतदाताओं के आधार पर 69 वोट 50 प्रतिशत से कम हैं। बाद में कुछ महिलाओं ने शिकायत की कि मतदाता सूची में 5 महिलाओं को मृत दर्शाया गया है और 3 नाम दोहराए गए हैं। तहसीलदार महागांव की जांच रिपोर्ट में मतदाताओं की संख्या 145 के बजाय 137 बताई गई। इसी आधार पर जिलाधिकारी ने 69 वोटों को 50 प्रतिशत से अधिक मानते हुए देशी शराब दुकान बंद करने का आदेश जारी किया था।
दुकान संचालकों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि मूल मतदाता संख्या 145 थी। आठ नाम बिना सुनवाई का अवसर दिए सूची से हटाए गए। कथित मृत महिलाओं के मृत्यु प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं थे और दोहरे नामों का दावा भी तथ्यात्मक रूप से गलत है।
सरकारी पक्ष ने अदालत में कहा कि वास्तविक मतदाता संख्या 137 थी। ऐसे में 69 वोट स्पष्ट बहुमत साबित करते हैं और जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेश नियमों के अनुरूप है।
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सभी पक्षों को सुनकर लिया जाएगा नया निर्णय
न्यायमूर्ति रोहित जोशी की अदालत ने कहा कि मतदाता सूची में बदलाव जैसा महत्वपूर्ण निर्णय संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर दिए बिना नहीं लिया जा सकता। कुछ नामों को हटाए जाने को लेकर संदेह और अस्पष्टता बनी हुई है। इसलिए सभी पक्षों को सुनकर नया निर्णय लिया जाना आवश्यक है। इसी आधार पर अदालत ने जिलाधिकारी का आदेश रद्द कर दिया और मामले को पुनः सुनवाई के लिए वापस भेज दिया है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय आने तक देशी शराब दुकान बंद ही रहेगी। सभी पक्षों को 1 जुलाई 2026 को जिलाधिकारी कार्यालय में उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, जिलाधिकारी को 15 अगस्त 2026 से पहले अंतिम निर्णय लेने को कहा गया है।
