श्रीरामनगरवासी फिर लौटे जंगल, दूसरी रात भी दहशत में गुज़री, जंगली जानवरों का खतरा
Shriramnagar Villagers Protest: श्रीरामनगर के पुनर्वसित ग्रामीण अधूरी 16 मांगों के विरोध में नवेगांव-नागझिरा जंगल लौटे। बच्चों संग दूसरी रात भी जंगली खतरे में, प्रशासन की नजरअंदाजी जारी है।
- Written By: आंचल लोखंडे
श्रीरामनगरवासी फिर लौटे जंगल (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Navegaon Nagzira Tiger Reserve News: सड़क अर्जुनी तहसील के श्रीरामनगर पुनर्वसित नागरिकों ने सरकार और वन विभाग पर दो वर्षों से केवल आश्वासन देने का आरोप लगाते हुए 4 दिसंबर को पुनः नवेगांव-नागझिरा टाइगर रिज़र्व के घने जंगल में लौटकर अस्थायी टेंट लगाकर निवास शुरू कर दिया है। महिलाओं और बच्चों सहित सभी ग्रामीण दूसरी रात भी जंगली जानवरों के डर के बीच गुज़ारने को मजबूर हुए, लेकिन प्रशासन की ओर से अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
तहसील के श्रीरामनगर पुनर्वास को वर्ष 2012 में पूरा किया गया था। लेकिन 13 वर्ष बीत जाने के बाद भी 16 बुनियादी मांगें अधूरी होने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से लेकर तहसीलदार तक सभी संबंधित अधिकारियों को कई बार पत्र और निवेदन देकर स्थिति से अवगत कराया, मगर समाधान न मिलने पर उन्होंने अब कठोर आंदोलन का रास्ता चुना है।
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प्रशासन ने नहीं ली सुध
ग्रामीणों का कहना है कि “अगर हमारी मांगें पूरी नहीं होंगी, तो हम अपने मूल गांव लौटकर खेती-बाड़ी करेंगे। सरकार ने हमें जोखिम में डाल दिया है।”जंगल में जंगली जानवरों का खतरा लगातार बना हुआ है, बावजूद इसके प्रशासन ने अब तक कोई संज्ञान नहीं लिया है। ग्रामीणों की एक ही मांग है कि सरकार तुरंत हस्तक्षेप कर उनकी सभी बुनियादी सुविधाएँ सुनिश्चित करे।
अधिकारी वर्षों से केवल आश्वासन देते आए हैं
श्रीरामनगर के पुनर्वसित ग्रामीणों ने अपनी 16 बुनियादी मांगें 13 वर्षों से पूरी न होने के विरोध में नवेगांव-नागझिरा टाइगर रिज़र्व के जंगल में लौटकर अस्थायी निवास बनाते हुए लगातार दूसरी रात भी जंगली जानवरों के खतरे के बीच गुज़ारी, जबकि प्रशासन की ओर से कोई संज्ञान नहीं लिया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार और संबंधित अधिकारी वर्षों से केवल आश्वासन देते आए हैं, इसलिए अब यदि उनकी मांगों पर तत्काल निर्णय नहीं हुआ, तो वे अपने मूल गांवों में स्थायी रूप से बसकर खेती-बाड़ी शुरू कर देंगे।
