10 करोड़ का प्रस्ताव अटका, मत्स्य क्रांति सिर्फ घोषणा? गोंदिया के तालाबों की बदहाली से बढ़ा संकट
Gondia Ponds Fishery Crisis: गोंदिया के 1,421 तालाब गाद और अतिक्रमण से बदहाल हैं। मरम्मत व सीमांकन योजना अधूरी रहने से मत्स्य व्यवसाय और भोई समुदाय की आजीविका संकट में है।
- Written By: अंकिता पटेल
गोंदिया तालाब, मत्स्य संकट, (सोर्स: सोशल मीडिया)
Gondia Ponds Encroachment: गोंदिया जिला तालाबों का जिला है। लेकिन तालाबों की हालत बेहद गंभीर है। कई वर्षों से गाद नहीं निकाली गई है। अतिक्रमण भी बढ़ गया है। जिससे तालाब अंतिम सांस ले रहे हैं। इसके चलते एक वर्ष पहले जिले के 1,421 मामा तालाबों की गणना और सीमांकन का प्रस्ताव तैयार किया गया था। 10 करोड़ रु. निधि की मांग का प्रस्ताव भी सरकार को भेजा गया।
लेकिन, वह प्रस्ताव पूरा नहीं होने से जिले में मत्स्य क्रांति की घोषणा महज राजनीतिक घोषणा बनकर रह गई जिले में पूर्व मालगुजारी तालाब अभी भी बचे हुए हैं। लेकिन, वर्षों से उनकी मरम्मत नहीं की गई है और न ही गाद निकाली गई है। परिणामस्वरूप तालाबों का अस्तित्व खतरे में पड़ता जा रहा है। जिले का भोई समुदाय इन तालाबों पर मछली पकड़ने का काम करता था।
पारंपरिक मछली पकड़ने वाला भोई-धीवर समुदाय अभी भी अपेक्षित जीवन जी रहा है। ऐसे में इस समाज और उनके व्यवसाय के अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह खड़ा हो गया है। वैकल्पिक व्यवसाय के अभाव के कारण इस समुदाय के समक्ष आजीविका की समस्या उत्पन्न हो गई है। सरकार ने तहसील में सिंचाई सुविधा पर ध्यान दिया। इस पर करोड़ों की निधि खर्च की गई, लेकिन सिंचाई की व्यवस्था नहीं की गई।
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भोई समुदाय के साथ सरकार खेल रही सियासी खेल
मत्स्य संरक्षाण विभाग को इस तरह का प्रस्ताव बनाकन वित्त विभाग को भेजने का निर्देश दिया गया। उद्देश्य यह था कि भोई समुदाय इस राब से मछली पालन करने में सक्षम हो। इस पौषणा का मछली पकड़ने वाले समुदाय ने स्वागत किया, लेकिन यह एक राजनीतिक घोषणा निकली, बताया गया है कि न तो प्रस्ताव तैयार हुआ और न ही धनराशि मिली, इसलिए एक बार फिर मामा तालाबों के अस्तिाच का प्रान लंबित रह गया
इस वर्ष औसत से 500 मिमी. अधिक बारिश
जिले की औसत वर्षा 1,326.54 मिमी है। गोंदिया जिले का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 5 लाख 64 हजार 100 हेक्टेयर है।
मानसून सीजन में भारी बारिश के कारण काफी नुकसान हुआ था।
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डिमर बंधुओं ने मामा तालाब और जिले की अन्य परियोजनाओं में मछली पकड़ने के लिए मछली के बीज डाले थे। बारिश के कारण मछलियां बाढ़ के पानी के साथ बह गई। इससे उन्हें काफी नुकसान भी हुआ।
लोगों की आजीविका एक गंभीर समस्या
मछली व्यवसाय के लिए आवश्यक उपाय नहीं किए गए है। इसके कारण पारंपरिक मछली पकड़ने का व्यवसाय संकट में है और कई लोगों की आजीविका एक गभीर समस्या बन गई है। आधे से अधिक तालाचों में पानी का स्तर काफी कम होने से समस्या उत्पन्न हो गई है।
इन सभी मामलों पर विचार करते हुए, तत्कालीन संरक्षक मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने जिले में 1,421 मामा तालाबों के अस्तित्य को बनाए रखने के उद्देश्य से मामा तालाबों का सीमांकन और गिनती पिछले साल की जाएगी और कहा कि इसके लिए 10 करोड़ रु। की आवश्यकता होगी।
