पानी बह रहा, खेत सूख रहे...गोंदिया में 294 कोल्हापुरी बांध जर्जर, प्रशासन के खिलाफ किसानों में रोष

Gondia Farmers Protest News: गोंदिया जिले के 294 कोल्हापुरी बांध जर्जर होने से सिंचाई संकट गहरा गया है। रखरखाव की कमी से हजारों हेक्टेयर खेती प्रभावित हो रही है।
Water is flowing, fields are drying up… 294 Kolhapuri dams in Gondia are dilapidated, farmers are angry with the administration.
कोल्हापुरी बांध, सिंचाई संकट,(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Gondia Water Storage Farmers Protest: गोंदिया जिले में लाखों रु। खर्च कर कोल्हापुरी बांध का निर्माण कराया गया ताकि सूखे की स्थिति में बांधों के पानी से खेती की सिंचाई की जा सके। लेकिन, निर्माण के बाद इनके रख-रखाव और मरम्मत पर ध्यान नहीं दिया गया। जिले के 294 कोल्हापुरी बांध जर्जर हो गए हैं। ऐसे में किसानों को सिंचाई के लिए पाइप लगाना पड़ता है।

प्रशासन बांधों की मरम्मत में लापरवाही बरत रहा है। इसलिए दिन-ब-दिन किसानों में प्रशासन के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा है। जिप के सिंचाई विभाग के अंतर्गत 294 कोल्हापुरी बांध हैं। इस बांध से जिले की लगभग 10,074 हेक्टेयर भूमि सिंचित हो सकेगी।

लेकिन, हजारों हेक्टेयर कृषि की सिंचाई नहीं की जा सकती क्योंकि अधिकांश बांध खराब स्थिति में हैं। ऐसे में किसान पानी के लिए भटक रहे हैं। कोल्हापुरी बांध शिवकाल के समय के 'माति अडवा, पानी जिरवा' को ध्यान में रखते हुए बनाए गए थे।

इससे हजारों हेक्टेयर भूमि की सिंचाई हो सकेगी। लेकिन, प्रशासन द्वारा रखरखाव व मरम्मत की अनदेखी के कारण इनकी हालत खराब हो गयी है। बांधों में बड़े गड्ढे हो गए हैं। ऐसे में यह पानी संग्रहित होने के बजाय बहता जा रहा है।

रख-रखाव व मरम्मत के लिए नहीं मिलता निधि

कोल्हापुरी बांध के रख-रखाव और मरम्मत के लिए अलग से सरकारी स्तर से कोई निधि नहीं मिलता है, जिला योजना समिति से निधि की मांग करनी पड़ती है, लेकिन, मांग की तुलना में इस समिति के माध्यम से बहुत कम निधि मिलता है। इसलिए बांधों की मरम्मत में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। -जिप गोंदिया, लघु सिंचाई विभाग, जलसंधारण अधिकारी, शशिकांत काले

जिला प्रशासन के पास निधि की कमी

बांध की मरम्मत के लिए जिला प्रशासन के पास निधि की कमी है। इसलिए पिछले वर्ष जिला योजना समिति से 22 करोड़ की मांग की गई थी। लेकिन, इसमें से सिर्फ 1.50 करोड़ की निधि ही मिल पाई। जबकि चालू आर्थिक वर्ष में जब 29 करोड़ प्रस्ताव आया तो सिर्फ 4.50 करोड़ की निधि ही प्राप्त हुई। वहीं, आदिवासी क्षेत्रों में सिंचाई के लिए सिर्फ 60 लाख रु. ही मिले।

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