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सड़क अर्जुनी. शालेय पोषण आहार योजना तहसील की 137 जिला परिषद शाला व निजी अनुदानित शालाओं में लागू की गई है. इससे कक्षा 1 से 8वीं तक के हजारों विद्यार्थियों को लाभ मिलता है. लेकिन, अधिकांश शालाओं को दिसंबर से राशन की आपूर्ति नहीं हुई है. कुछ शालाओं में पोषाहार बचा है, उन्हें छोड़कर शेष सभी शालाओं में पिछले एक महीने से पोषाहार नहीं बना है.
इससे हजारों विद्यार्थी मध्यान्ह भोजन से वंचित हैं. तहसील के जिला परिषद व अनुदानित शालाओं में पोषण आहार का नियमित कोटा समाप्त हो गया है. शालाओं में पोषण आहार के वितरण के लिए तहसील स्तर पर एक आपूर्तिकर्ता को निश्चित किया गया है. लेकिन शालाओं को भोजन की आपूर्ति ठीक तरह से नहीं हो रही है.
अधिकांश शालाओं को दिसंबर 2022 से चावल की आपूर्ति नहीं की गई है. कुछ शालाओं में चावल की आपूर्ति की गई. लेकिन आपूर्तिकर्ता ने चना, मटर दाल, उड़द जैसी दालों की आपूर्ति नहीं की. तो छात्रों को चावल के साथ क्या खाना चाहिए, यह प्रश्न है. पिछले एक महीने से अनाज की आपूर्ति नहीं हो पाई है. परिणामस्वरूप शालाओं में पौष्टिक भोजन नहीं पकाया जा रहा है. जिससे ऐसी शालाओं के हजारों विद्यार्थी एक माह से मध्यान्ह भोजन योजना से वंचित हैं.
उल्लेखनीय है कि नियमित आपूर्ति नहीं होने के कारण तहसील में विद्यार्थी पोषण आहार से वंचित हैं. पोषण आहार योजना कई आदिवासी, गरीब छात्रों के लिए एक सहारा थी. यह योजना शाला छोड़ने वालों को कम करने और शाला में उपस्थिति बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी.
[blockquote content=”पोषाहार नहीं मिलने से विद्यार्थी पोषाहार से वंचित हैं. निजी व्यापारियों से अनाज खरीदना और खाना बनाना प्रधानाध्यापक के अधिकार में नहीं है. इसे लेकर कोई आदेश नहीं है.” pic=”” name=”जितेंद्र चन्ने (अध्यक्ष-स्कूल प्रबंधन समिति पांढरी)”]
[blockquote content=”इस संबंध में तहसील के आपूर्तिकर्ता से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि लेबर के अभाव में आपूर्ति का काम बाधित हो गया है. जल्द ही शालाओं में आनाज की आपूर्ति की जाएगी ऐसा आश्वासन दिया. ” pic=”” name=”सुभाष बागड़े (समूह शिक्षा अधिकारी-सड़क अर्जुनी)”]






