Mahatma Gandhi dispute free committee (सोर्सः सोशल मीडिया)
Rural Conflict Settlement Maharashtra: महात्मा गांधी तंटा मुक्त समिति का गठन पूरे महाराष्ट्र में पूर्व गृहमंत्री आर.आर. पाटिल द्वारा किया गया था। स्वतंत्रता दिवस की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर 15 अगस्त 2007 को इस समिति की शुरुआत हुई थी। इस पहल के तहत ग्रामवासियों को ग्रामसभा में विवाद मुक्त समिति गठित करने का अधिकार दिया गया था। हालांकि आज भी अनेक ग्राम पंचायतों में यह समिति केवल कागजों तक सीमित रह गई है।
इस समिति का मुख्य उद्देश्य गांवों में होने वाले आपसी विवादों को बातचीत से सुलझाकर लोगों को पुलिस और न्यायालय तक जाने से रोकना तथा न्याय व्यवस्था पर भार कम करना था। महात्मा गांधी विवाद मुक्त समिति का चयन ग्रामसभा के माध्यम से किया जाता है, जिसमें एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष और गांव के पुलिस पाटिल को सचिव बनाया जाता है। नियम के अनुसार विवाद की शिकायत पहले समिति के समक्ष रखना आवश्यक है। यदि समिति के स्तर पर समाधान नहीं होता, तभी मामला पुलिस को सौंपा जाता है।
यदि गांव स्तर पर ही दोनों पक्षों के बीच समझौता हो जाए, तो वे लंबी कानूनी प्रक्रिया से बच सकते हैं और पुलिस व न्यायालय का समय भी बचाया जा सकता है। लेकिन प्रशासन की अनदेखी के कारण कई जगह विवाद मुक्त समिति प्रभावहीन हो गई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर समिति अध्यक्ष या दो-तीन प्रमुख लोग ही विवाद सुलझाने का प्रयास करते हैं और अन्य सदस्यों को इसकी जानकारी भी नहीं दी जाती। उल्लेखनीय है कि कई गांवों को ‘महात्मा गांधी तंटा मुक्त’ पुरस्कार भी मिल चुका है।
गांव स्तर पर जब दो पक्षों में विवाद होता था, तो पहले समिति के पास आवेदन दिया जाता था। इसके बाद ग्राम पंचायत द्वारा दोनों पक्षों को नोटिस देकर समिति के पदाधिकारियों के समक्ष बुलाया जाता था और विवाद के कारणों को समझकर आपसी समझौते की कोशिश की जाती थी। इस प्रक्रिया से कई मामलों का समाधान गांव स्तर पर ही हो जाता था, जिससे अपराधों में भी उल्लेखनीय कमी आई थी।
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लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कई गांवों में यह अभियान ठंडे बस्ते में चला गया है। परिणामस्वरूप मामूली विवाद होने पर भी लोग सीधे पुलिस थाने पहुंच रहे हैं। अनेक ग्राम पंचायतों में यह समिति अब केवल नाममात्र के लिए रह गई है।