गोंदिया न्यूज
Maharashtra Primary Teachers: गोंदिया जिला परिषद के शिक्षकों पर पढ़ाने के अलावा दूसरे कामों का भी बोझ है। इसका सीधा असर स्कूली बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है, और अभिभावकों का इंग्लिश स्कूलों की तरफ आकर्षण बढ़ गया है। शिक्षकों का कहना है कि अगर शिक्षा विभाग सिर्फ शिक्षा पर ध्यान दें और दूसरे कामों के लिए एक अलग यंत्रणा बनाए तो शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होगी।
जिले में शिक्षकों के कुल 3523 पद मंजूर है जिनमें से 2826पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति हुई है तथा 697 शिक्षकों के पद रिक्त है। इसकी वजह से काम करने वाले शिक्षकों पर अतरिक्त बोझ पड़ रहा है और स्कूली बच्चों की पढ़ाई का भी नुकसान हो रहा है।
जिले में 943 स्नातक शिक्षकों के पद मंजूर हैं, जिनमें से 773 पद भर दिए गए हैं, जबकि 180 खाली हैं। 13 अतिरिक्त स्नातक शिक्षक भी हैं। जिला परिषद के प्राथमिक शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड से यह भी पता चला कि जिले के 210 स्कूलों में कोई भी महिला शिक्षक कार्यरत नहीं है।
गोंदिया जिला आदिवासी और नक्सल प्रभावित है, और इस जिले के कई स्कूल दूर-दराज के इलाकों में हैं। इन दूर-दराज के इलाकों में विद्यार्थियों की पटसंख्या की कमी के कारण स्कूल बंद होने की कगार पर थे। इन स्कूलों के बंद होने का डर विद्यार्थियों के साथ-साथ अभिभावक व शिक्षकों को भी सता रहा था।
लेकिन, जिले के तीन स्कूलों को पास के स्कूलों में शामिल कर दिया गया। जिले में दस से कम पटसंख्या वाले 42 स्कूल हैं। हालांकि सरकार का इरादा कम पटसंख्या वाले लगभग दो-तीन स्कूलों को मिलाकर एक ग्रुप स्कूल चलाने का है, लेकिन जिले में सिर्फ एक ग्रुप स्कूल का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है।
स्कूल के बच्चों को अच्छी गुणवत्ता की पढ़ाई देने के लिए शिक्षकों पर अतिरिक्त काम का बोझ नहीं डालना चाहिए। उम्मीद है कि सरकार अतिरिक्त काम का बोझ कम करेगी।
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शिक्षक सरकारी कर्मचारी होता है। अगर उसे पढ़ाने के अलावा काम दिया जाता है, तो वह करता है। लेकिन, इसका शिक्षा पर बुरा असर नहीं पड़ना चाहिए। जिले में शिक्षकों के पद रिक्त हैं। रिक्त पदों पर शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया पवित्र पोर्टल के जरिए की जाती है। इस बारे में सरकार को रिपोर्ट भेज दी गई है। इसके अलावा, हर वर्ष सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों की संख्या भी बड़ रही है। रिक्त पदों को जल्द ही भरा जाएगा।
गोंदिया जिला परिषद, नगर परिषद, निजी अनुदानित व स्वंयसहायक स्कूलों में 10 से कम पटसंख्या वाले 42 स्कूल हैं। डर था कि दस से कम पटसंख्या वाले स्कूल बंद हो जाएंगे। लेकिन, इसका हल निकाला गया। जिला परिषद के स्कूल निजी स्कूलों से पीछे न रहें, इसके लिए कई कोशिशें की जा रही हैं।
लेकिन, पिछले तीन-चार वर्षों से जिला परिषद के स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिले के 97 स्कूलों में से हर एक में सिर्फ एक टीचर काम कर रहा है, और उन पर चार कक्षाओं का बोझ है। साथ ही शिक्षकों को अतिरिक्त काम सौंप दिया गया है। इन कामों से विद्यार्थियों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है।