
फर्जी फोटो पर प्रशासन सख्त (सौजन्य-नवभारत)
Gondia Tiger Rumors: गोंदिया जिले में बाघ, तेंदुआ और दूसरे वन्यजीवों की नकली, एडिटेड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टेक्नोलॉजी से बनी फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। यह गुमराह करने वाली और बिना जांच वाली जानकारी लोगों में बेवजह डर और गलतफहमी पैदा कर रही है, और अगर कोई असली जंगली जानवरों से जुड़ी घटना होती भी है, तो उसे गंभीरता से नहीं लिया जाता।
ऐसी खतरनाक स्थिति पैदा होने पर गंभीर चिंता जताई जा रही है। पर्यावरण और जंगली जानवरों के बचाव के लिए काम करने वाली सेवा संस्था ने इस बारे में जानकारी देते हुए लोगों से सावधान रहने की अपील की है। संस्था के अनुसार, कई बार दूसरे राज्यों, विदेशों या पुरानी घटनाओं की फोटो और वीडियो को गोंदिया जिले का बताकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया जाता है।
अभी AI टेक्नोलॉजी की वजह से बहुत असली जैसी दिखने वाली नकली फोटो और वीडियो आसानी से बन जाती है, जिससे आम लोगों को धोखा मिल रहा है। संस्था ने कहा है कि लगातार झूठी और AI से बनी जानकारी फैलने से लोगों की संवेदनशीलता कम हो रही है। इस वजह से, अगर कोई असली घटना होती भी है, तो यह सोच बन जाती है कि यह भी जरूर कोई अफवाह होगी।
इस वजह से, समय पर वन विभाग, पुलिस या प्रशासन तक जानकारी नहीं पहुंच पाती। इसका सीधा असर नागरिकों की सुरक्षा, किसानों की जान के साथ-साथ वन्यजीव व्यवस्था पर पड़ता है। संस्था ने साफ किया है कि जंगली जानवरों की हलचल, हमलों या आपातकालीन के बारे में अधिकृत जानकारी सिर्फ वन विभाग या जिला प्रशासन ही देता है।
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सोशल मीडिया पर कोई भी फोटो, वीडियो, रील या मैसेज अंतिम सबूत नहीं माना जा सकता। इसलिए, हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि कोई भी जानकारी फॉरवर्ड करने से पहले उसकी असलियत जांच लें।
संस्था ने साफ कहा है कि सिर्फ झूठी जानकारी बनाना ही नहीं, बल्कि उसे आगे शेयर करना भी जुर्म हो सकता है। ‘मुझे लगा कि जानकारी सच है’ यह वजह कानून के सामने ठीक नहीं है। संस्था की तरफ से नागरिकों से अपील की गई है कि वे संदिग्ध फोटो या वीडियो की रिपोर्ट तुरंत स्थानीय वन विभाग, पुलिस या प्रशासन को दें, उन्हें सोशल मीडिया पर शेयर न करें। साथ ही, अगर सच में कोई वन्यजीव से जुड़ी घटना होती है, तो उसे नजरअंदाज न करें और तुरंत अधिकृत यंत्रणा से संपर्क करें।






