चुनावों के लिए शहर में होर्डिंग्स की भरमार, गोंदिया नगर परिषद ने अवैध होर्डिंग्स पर आंखें मूंदी
Gondia Nagar Parishad Elections:गोंदिया नगर परिषद चुनाव से पहले शहर में अवैध होर्डिंग्स की भरमार। प्रशासन की लापरवाही से लाखों रुपए का राजस्व डूबने की आशंका है।
- Written By: आंचल लोखंडे
लाखों रुपये का राजस्व डूब रहा
Gondia City News: नगर परिषद चुनावों की आहट के साथ ही शहर में प्रत्याशियों की होर्डिंग्स की बाढ़ आ गई है। संभावित उम्मीदवार अधिक से अधिक लोगों तक अपनी मौजूदगी दिखाने के लिए जगह-जगह बड़े-बड़े पोस्टर और होर्डिंग्स लगा रहे हैं। नवरात्रि से लेकर दिवाली तक त्योहारी माहौल के बीच ये प्रचार सामग्री शहर की हर गली-मोहल्ले में दिखाई दे रही है।
नगर परिषद का कार्यकाल समाप्त हुए साढ़े तीन वर्ष से अधिक समय बीत चुका है और तब से प्रशासन की बागडोर प्रशासक के हाथों में है। ऐसे में संभावित उम्मीदवार बीते कई वर्षों से चुनाव की तैयारी में जुटे थे और केवल तारीखों की घोषणा का इंतजार कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट द्वारा चुनाव कराने के आदेश जारी होते ही प्रशासन ने प्रक्रिया शुरू की, और प्रत्याशियों ने भी अपने-अपने स्तर पर तैयारी तेज कर दी। अब कोर्ट के आदेश के बाद ऐसा प्रतीत होता है कि दावेदारों को पूरे त्योहारी सीजन में प्रचार का अवसर मिल गया है।
होर्डिंग विक्रेताओं को मिल रही है अच्छी कमाई
नगराध्यक्ष और वार्डों के आरक्षण की घोषणा के बाद दावेदारों के लिए प्रचार का यह सही समय साबित हो रहा है। शहर की मुख्य सड़कों से लेकर छोटे-छोटे मोहल्लों तक प्रत्याशियों के ‘हाथ जोड़े’ हुए पोस्टर और होर्डिंग्स लगाए गए हैं। इससे जहां एक ओर शहर की सुंदरता बिगड़ रही है, वहीं दूसरी ओर होर्डिंग व्यवसायियों को जबरदस्त मुनाफा हो रहा है। आगामी चुनाव तक यह सिलसिला जारी रहने की संभावना है।
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राजस्व का नुकसान और अव्यवस्था
नगर परिषद प्रशासन की लापरवाही के कारण इन अवैध होर्डिंग्स पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जा रही है। इससे न केवल शहर की छवि प्रभावित हो रही है, बल्कि नप के लाखों रुपये का संभावित विज्ञापन राजस्व भी डूब रहा है। नागरिकों का कहना है कि प्रशासन ने यदि समय रहते इन पर नियंत्रण नहीं किया, तो चुनावों के दौरान शहर पूरी तरह पोस्टरों से पट जाएगा।
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कई प्रत्याशियों का बजट गड़बड़ाया
कई संभावित उम्मीदवारों ने नगर परिषद का कार्यकाल समाप्त होते ही चुनाव की संभावना मानकर प्रचार शुरू कर दिया था। पिछले तीन वर्षों से लगातार होर्डिंग्स लगाते रहने के कारण उनका चुनावी बजट बिगड़ गया है। अब जबकि चुनाव की तारीखें तय होने लगी हैं, कई प्रत्याशी आर्थिक रूप से दबाव में आ गए हैं।
