Gondia News: मनेरी वन समिति के 25 लाख के विकास कार्यों में अनियमितता के आरोप, जांच की मांग
Maneri Forest Committee: गोंदिया के मनेरी वन समिति के वर्ष 2023-24 के 25 लाख रुपये के विकास कार्यों में अनियमितता के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों ने अध्यक्ष और सचिव पर नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया।
- Written By: आंचल लोखंडे
गोंदिया वन समिति- एआय जनरेटेड फोटो (सोर्सः सोशल मीडिया)
Gondia Forest Committee: सड़क अर्जुनी तहसील के मनेरी स्थित वन समिति के वर्ष 2023-24 के लगभग 25 लाख रु. के विकास कार्यों में अनियमितता के गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों ने समिति के अध्यक्ष व सचिव पर सदस्यों को विश्वास में लिए बिना और नियमित बैठकें आयोजित किए बिना विकास कार्य कराने तथा खर्च का विवरण छिपाने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों द्वारा की गई शिकायत के अनुसार, वर्ष 2023-24 में मनेरी वन समिति को 25 लाख रु. का निधि प्राप्त हुआ था। शासन के नियमानुसार इस राशि का 67 प्रश. गांव के विकास कार्यों तथा 33 प्रश. वन क्षेत्र के विकास कार्यों पर खर्च किया जाना था। आरोप है कि इस नियम का पालन नहीं किया गया और वन क्षेत्र के कार्यों पर निर्धारित राशि से अधिक खर्च किया गया।
ग्रामीणों ने की शिकायत
ग्रामीणों का दावा है कि जहां वन क्षेत्र के लिए लगभग 8 लाख रु. खर्च होना चाहिए था, वहीं करीब 12 लाख रु. खर्च दिखाए गए, जिससे लगभग 4 लाख रु. की अतिरिक्त राशि खर्च किए जाने का संदेह है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जिन विकास कार्यों पर राशि खर्च की गई, वे मनेरी गांव की सीमा में न होकर दूसरे गांव के वन क्षेत्र में किए गए। वन समिति के निधि से निशानी कैंप, कक्ष क्र. 700, खड़की-1 में चार जालीदार गैबियन बांधों के निर्माण पर 5.95 लाख रु. तथा बोरवेल व सोलर पंप पर 3.17 लाख रु. खर्च किए गए।
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पाले गए शासन के नियम
तत्कालीन वनरक्षक व सचिव, मनेरी राजू परसगाये ने कहा कि मेरे सचिव कार्यकाल के दौरान सभी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही किए गए। प्रत्येक कार्य की जानकारी वन समिति के सदस्यों को समय-समय पर दी जाती रही।
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निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हुए काम
समिति अध्यक्ष दिलीप भेंडारकर ने कहा कि समिति द्वारा किए गए सभी विकास कार्य शासन के नियमों व निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही किए गए हैं, कार्यों में किसी प्रकार का भ्रष्टाचार या वित्तीय अनियमितता नहीं हुई है। कई सदस्य नियमित बैठकों में उपस्थित नहीं रहते। बैठक में अनुपस्थित रहने के कारण उन्हें पारित प्रस्तावों व स्वीकृत विकास कार्यों की जानकारी नहीं रहती, जिसके चलते वे बिना तथ्य के आरोप लगा रहे हैं।
