जंगल में आगजनी की रोकथाम के लिए गोंदिया वन विभाग सतर्क, फायर लाइन जलाने का काम शुरू
Gondia Forest Department: गोंदिया में वन विभाग ने जंगलों में बढ़ती आग की घटनाओं को देखते हुए 15 जून तक रेड अलर्ट जारी कर फायर लाइन और सैटेलाइट निगरानी के जरिए रोकथाम के निर्देश दिए हैं।
- Written By: आंचल लोखंडे
wildfire prevention (सोर्सः सोशल मीडिया)
Gondia Forest Fire Alert: गोंदिया वन विभाग के अधीन जंगलों में आग की घटनाएं शुरू हो गई हैं। एहतियाती उपाय के तौर पर जंगलों में फायर लाइन जलाने का काम शुरू कर दिया गया है। अब आग से जंगलों की सुरक्षा के लिए वन अधिकारियों से लेकर क्षेत्रीय कर्मचारियों तक को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं।
गोंदिया जिले में अपार वन संपदा मौजूद है। यहां टाइगर प्रोजेक्ट भी संचालित है और विभिन्न प्रजातियों के कीमती पेड़ पाए जाते हैं। लेकिन हर साल बड़े पैमाने पर लगने वाली आग से जंगलों को भारी नुकसान होता है। 15 जून तक ‘रेड अलर्ट’ घोषित किया गया है। आग बुझाने के साथ-साथ नागरिकों के सहयोग से आग लगने की घटनाएं रोकी जाएं, इसके लिए संबंधितों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान
एक ओर करोड़ों रुपये खर्च कर पौधारोपण किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर गर्मियों में हर साल हजारों हेक्टेयर जंगल आग की भेंट चढ़ जाते हैं। इसमें रेंगने वाले जीवों से लेकर जंगली जानवरों तक की मौत हो जाती है। करोड़ों रुपये की वन संपदा नष्ट होने के साथ पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान पहुंचता है।
सम्बंधित ख़बरें
वृक्षधरा फाउंडेशन का भव्य पौधारोपण अभियान, पर्यावरण संरक्षण का लिया सामूहिक संकल्प
गोंदिया में खाद कंपनियों की मनमानी से विवाद; यूरिया के साथ दूसरा उर्वरक लेने की अनिवार्यता से विक्रेता परेशान
महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला: वनाधिकार धारक आदिवासी किसानों के लिए लागू होंगे अलग 7-E और 12-E रिकॉर्ड
SIR सर्वेक्षण से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित, गोंदिया में स्कूल व्यवस्थापन समिति ने उठाई आवाज
जंगल में लगने वाली आग मानव निर्मित और प्राकृतिक दोनों प्रकार की होती है, लेकिन अब तक की जांच में अधिकांश घटनाएं मानव निर्मित पाई गई हैं। इन्हें रोकने के लिए क्षेत्रीय वनकर्मियों और अधिकारियों को गांव-गांव में बैठकें लेकर जनजागरण, प्रचार-प्रसार तथा वन प्रबंधन समितियों और ग्रामीणों का सहयोग लेने के निर्देश दिए गए हैं।
फायर लाइन काटने और नियंत्रित रूप से जलाने का कार्य
आग के मौसम को देखते हुए फरवरी तक फायर लाइन काटने और नियंत्रित रूप से जलाने का कार्य किया गया है। प्रत्येक वनखंड में 6 मीटर तथा अंतरराज्यीय और जिला सीमा रेखा पर 12 मीटर चौड़ी फायर लाइन तैयार की गई है, ताकि आग आगे न फैल सके। घास वाले क्षेत्रों में सड़कों के किनारे का कचरा नियंत्रित रूप से जलाकर सुरक्षा उपाय किए जा रहे हैं।
ये भी पढ़े: Amravati News: स्थायी समिति व 8 स्वीकृत सदस्यों का चयन, मनपा की पहली सर्वसाधारण सभा संपन्न
सैटेलाइट से मिलेगी आग की जानकारी
वनकर्मियों को जंगल में आग लगने की सूचना के साथ-साथ उसके सटीक स्थान की जानकारी रखना भी अनिवार्य किया गया है। संबंधित उपवनसंरक्षक और वरिष्ठ अधिकारियों को सर्वे ऑफ इंडिया की ओर से सैटेलाइट के माध्यम से आग की जानकारी भेजी जाती है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में कुछ इलाकों में जंगल की आग बुझाने के लिए प्रकृति प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी बताई गई है।
