बैनर-पोस्टर OUT, वाट्सएप-इंस्टाग्राम IN! सोशल मीडिया ने बदला चुनावी खेल, ऑनलाइन चल रहा पूरा प्रचार
Social Media Political Outreach: गोंदिया में नगर परिषद चुनाव का प्रचार अब पूरी तरह हाईटेक। उम्मीदवार वाट्सएप, इंस्टाग्राम और फेसबुक से तेजी से मतदाताओं तक पहुंच रहे हैं। डिजिटल जनसंपर्क चरम पर।
- Written By: प्रिया जैस
सोशल मीडिया पर चुनाव प्रचार (डिजाइन फोटो)
Political WhatsApp Groups: गोंदिया जिले में नगर परिषद व नपं के चुनाव 2 दिसंबर को हो रहे। जिससे संभावित प्रत्याशी अपने चुनाव प्रचार-प्रसार के लिए मतदाताओं के पास पहुंच रहे हैं। वहीं प्रत्याशियों द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से चुनावी जनसंपर्क अभियान तेज कर दिया गया है। 5G के इस युग में चुनावी प्रत्याशियों का प्रचार भी हाईटेक हो गया है।
सभी सोशल मीडिया के माध्यम से अपने-अपने मतदाताओं के करीब पहुंचते हुए नजर आ रहे हैं। आज के समय में सभी को डिजिटल से जुड़े रहना जरूरी हो गया है। अगर कोई सोशल मीडिया पर जुड़ा हुआ नहीं है तो समझो वह जमाने से बहुत पीछे नजर आता है। पहले के समय में दीवारों पर चुनाव प्रचार वह कपड़े के बैनरों पर हाथ से लिखा जाता था, खड्डों या सफेद पेपर पर चुनाव प्रचार के लिए नारे लिखे जाते थे।
डिजिटल जमाना के साथ चल रहे प्रत्याशी
अब यह सब नजर ही नहीं आते। आज के समय में डिजिटल जमाना होने के कारण वाट्सएप, इंस्टाग्राम, फेसबुक आदि एप्लीकेशन का ज्यादा से ज्यादा उपयोग किया जा रहा है। जो चुनाव प्रचार में प्रत्याशियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है।
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आज के समय में उम्मीदवारों द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा मतदाता से संपर्क बनाए हुए हैं और अलग-अलग ग्रुपों द्वारा मतदाताओं के करीब पहुंचते हुए नजर आ रहे हैं। मतदाताओं को भी सोशल मीडिया के माध्यम से मोबाइल द्वारा सब जानकारी मिल जाती है कि कौन सा नेता कहां पर प्रचार करने आ रहा है।
मोबाइल पर रख रहें हिसाब-किताब
किस उम्मीदवार की सभा कहां पर है, कौन नेता कहां पर आ रहा है और कहां पर है, प्रत्याशी का कौन सा निशान है, मोबाइल पर ही हार जीत का गणित लगा लिया जाता है। पहले वोट मांगने के लिए गांव-गांव में हर चौक-चौक में प्रत्याशियों के बैनर लगे हुए रहते थे। लेकिन आज के दौर में कुछ नियमों शर्तों के तहत ही बैनर लगाए जा रहे हैं। आज के समय में अब वाट्सएप के माध्यम से वोट मांग रहे हैं। मैसेज भेज कर व कॉल करके जनसंपर्क बढ़ाया जा रहा है। उम्मीदवारों द्वारा सभी मतदाता के पास पहुंचाना मुश्किल हो जाता है।
