धान (सौजन्य-नवभारत)
Delayed Procurement Centers: खरीफ मौसम की धान की फसल की कटाई और चुराई शुरू हो गई है। लेकिन अब तक सरकारी समर्थन मूल्य धान खरीदी केंद्र शुरू नहीं हुए हैं। किसानों के हाथ में पैसे ही नहीं हैं। ऐसे में किसानों को कर्ज लेकर कृषि कार्य निपटाने की नौबत आ गई है।
इस वर्ष किसानों को अतिवृष्टि, बाढ़ स्थिति का सामना करना पड़ा।
इसके कारण किसानों को धान की बुआई दोबारा करनी पड़ी। कृषि कार्य, बीज, खाद और मजदूरी का खर्च दो बार सहना पड़ा। प्रशासन की ओर से क्षति के पंचनामे किए गए। लेकिन क्षतिग्रस्तों को अब तक मुआवजा नहीं मिला। धान खरीदी केंद्र शुरू नहीं होने से खरीफ में चुराई की धान फसल कहां बेचें, इस चिंता में किसान है।
केंद्र की ओर से जिला मार्केटिंग फेडरेशन धान खरीदी करता है। किसानों ने ई-फसल पंजीयन करने पर किसानों को गारंटी भाव व उसके ऊपर बोनस दिया जाता है। सरकार के पोर्टल पर पंजीयन शुरू है। लेकिन सरकार के कठिन शर्तों से खरीदी संस्थाओं में नाराजगी है।
इसके कारण किसानों को कम भाव में निजी व्यापारियों को धान बेचना पड़ रहा है। किसानों के पास धान कटाई, चुराई के लिए पैसे नहीं है। खेतीहर मजदूरों को मजदूरी के पैसे देने पड़ते हैं। इस लिए कई किसान निजी व्यापारियों को धान बेच रहे हैं।
धान की कटाई धड़ल्ले से शुरू हुई है। धान कटाई करके आंगन में धान रखने के अलावा कोई उपाय नहीं है। धान रखने की जगह के अभाव में आंगन में धान भगवान भरोसे पर छोड़ना पड़ रहा है। किसानों की आर्थिक स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। उत्पादन खर्च में वृद्धि व उपज घटती जा रही है।
धान खरीदी संस्थाओं की बाधाओं, धान खरीदी से संबंधित कड़े नियम व शर्तों के कारण जिला पणन कार्यालय व आदिवासी विकास महामंडल द्वारा जिले में अब तक धान खरीदी केंद्र प्रारंभ नहीं किए जा सके हैं। इसलिए निजी व्यापारियों ने धान खरीदने के लिए अपना जाल फैलाना शुरू कर दिया है और गांव-गांव में इन व्यापारियों का संघर्ष शुरू हो गया है।
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जिले में हमेशा देखा जाता है कि किसानों को जरूरतों और कर्ज चुकाने के लिए धान बेचना पड़ता है और दलालों को अपनी टोपी बचानी पड़ती है। सरकार व प्रशासन की लेटलतीफी के कारण अब किसानों को धान बेचने के लिए दलालों द्वार पर खड़े होने की नौबत आ गई है। किसान शासकीय आधारभुत धान खरीदी केंद्र शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं।
जिले के जरूरतमंद किसानों ने समर्थन मूल्य से कम कीमत पर निजी व्यापारियों को धान बेचना शुरू कर दिया है। इस पर जन प्रतिनिधियों को ध्यान देने की जरूरत है। इस वर्ष वापसी की बारिश से किसानों को भारी परेशानी हुई। वहीं पहले बादल छाए रहने से धान की फसल प्रभावित हुई है। कई खेतों में धान पर मावा, तुड़तुड़ा, करपा आदि रोग लग गए। जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई।