

Gondia Paddy Procurement: न्यूनतम समर्थन मूल्य खरीदी योजना के तहत पणन सत्र 2025-26 में खरीदे गए धान की मिलिंग के बाद जमा किए गए अतिरिक्त सीएमआर चावल की गुणवत्ता को लेकर मिली शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है। इन शिकायतों की जांच के लिए विभागीय आयुक्त ने चार सदस्यीय समिति गठित की है। समिति को आठ दिनों में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश के बाद राइस मिलर्स और आपूर्ति विभाग में हलचल मच गई है।
जिले में जिला मार्केटिंग फेडरेशन व आदिवासी विकास महामंडल के सरकारी धान खरीदी केंद्रों के माध्यम से किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदा जाता है। इसके बाद अनुबंधित राइस मिलर्स के माध्यम से धान की मिलिंग कर सीएमआर चावल शासन के पास जमा किया जाता है। आगे यही चावल सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राज्य के अन्य जिलों के राशन दुकानों में भेजा जाता है।
वर्ष 2025-26 में गोंदिया जिले में खरीदे गए धान की मिलिंग के बाद जमा सीएमआर चावल को अमरावती, बुलढाणा, जालना, वाशिम और मुंबई सहित अन्य जिलों में भेजने के लिए जिला जोड़णी आदेश जारी किए गए थे। चावल की उठाव और आपूर्ति के दौरान गुणवत्ता सहित अन्य आपूर्ति संबंधी शिकायतें शासन और विभागीय आयुक्त कार्यालय तक पहुंचीं। शिकायतों में गोंदिया से भेजे गए चावल के एफएक्यू मानकों पर भी सवाल उठाए गए।
अन्न, नागरिक आपूर्ति व ग्राहक संरक्षण -७८ विभाग, मंत्रालय के निर्देश पर अक्टूबर को विभागीय आयुक्त ने चार सदस्यीय जांच समिति गठित की। समिति गोंदिया जिले से उठाए गए सीएमआर चावल की गुणवत्ता, गोदामवार उपलब्ध स्टॉक, वजन कांटों की सटीकता, रसीद में दर्ज वजन और प्रत्यक्ष उठाव के दौरान पाए जाने वाले वजन में अंतर सहित संबंधित मामलों की मौके पर जाकर जांच करेगी।
जांच दल में विभागीय आयुक्त कार्यालय नागपुर के विभागीय तकनीकी अधिकारी संतोष सरडे को प्रमुख बनाया गया है। उनके साथ विभागीय आपूर्ति अधिकारी पंकज जलेकर, सहायक अब्बल कारकून विकास बिपटे और सहायक स्वप्निल इंभारे शामिल है। जानकारी के अनुसार समिति जांच शुरू करेगी और निर्धारित अवधि में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।