बिरसी फाटा बना मौत का टी-प्वाइंट! गोंदिया में हादसों का सिलसिला जारी

Gondia News: तिरोड़ा-तुमसर रोड पर बिरसी फाटा का टी-प्वाइंट हादसों का गढ़ बन चुका है। सर्विस रोड पर अतिक्रमण और पार्किंग से ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं।
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बिरसी फाटा टी-प्वाइंट (फोटो नवभारत)
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Tiroda-Tumsar Road T Point Danger: तिरोड़ा-तुमसर-साकोली-भंडारा रोड पर स्थित बिरसी फाटा का मुख्य चौक का टी प्वाईंट (मुख्य चौक) अब खतरनाक होता जा रहा है। यहां आए दिन दुर्घटनाएं हो रही है। इसके पूर्व भी इस स्थान पर अनेक दुर्घटनाएं हुई है। तुमसर से तिरोड़ा तक सीमेंट रोड़ बनाकर मार्ग का चौड़ाईकरण किया गया है लेकिन दोनों ओर बने सर्विस रोड और डीवाइडर के कारण यह टी प्वाईंट और भी ज्यादा खतरनाक बन गया है।

दोनों बाजू के सर्विस रोड पर सड़क किनारे की छोटी दुकानें, मैकेनिक, चाय, पान दुकानें सभी ने सर्विस रोड को ग्राहकों के लिए पार्किंग बना दिया है। जिससे सर्विस रोड का उपयोग जाने आने के लिए कम और वाहन पार्किंग के लिए ज्यादा हो रहा है। कई निजी वाहन इन सर्विस रोड़ पर पार्क की जाती है। जो बहुत ही तकलीफदेय है।

इस टी पाईंट से रोजाना तिरोड़ा से नागपुर, भंडारा, साकोली की ओर जानेवाले भारी वाहन, बस, ट्रक, मोटरसाइकिल भारी संख्या में चल रही है। अदानी पावर प्लांट में आने-जाने वाले कोयले के भारी ट्रेलर, राख और रेत के ओवरलोड ट्रक और अन्य सभी वाहन बड़ी भारी संख्या में तेजी से दौड़ते हुए इस रोड पर चल रहे हैं।

स्कूली बच्चे और पैदल चलने वाले आ रहे चपेट में

इस बीच रोड पार करने वाले छोटे वाहन, स्कूली बच्चे और पैदल चलते नागरिक इन वाहनों की चपेट में आर रहे है। कई घटनाएं हो चुकी है। यहां स्पीड ब्रेकर लगने चाहिए जिससे इस टी पाईंट से गुजरने वाले बेलगाम वाहनों की गति नियंत्रित की जा सकती है। नागरिकों की ओर से यहां से तुमसर, साकोली व भंडारा की ओर जाने वाली सड़क पर स्पीड ब्रेकर लगाने की मांग की जा रही है।

जनप्रतिनिधियों की उदासीनता

बिरसी फाटा से तिरोड़ा की ओर कुछ ही फासले पर मलपुरी की ओर जाने वाली सड़क के पास राज्य मार्ग के सीमेंटीकरण का काम अधूरा होने से यहां अनेक दुर्घटनाएं हो रही है। कुछ यात्रियों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी है।

इस मार्ग पर जो समस्या नागरिकों को हो रही है उससे स्थानीय जनप्रतिनिधि अनभिज्ञ है ऐसा हो ही नहीं सकता क्योंकि आम और खास सभी के जाने आने का मार्ग तो एक ही है लेकिन जानबूझकर जनसमस्याओं को नजरअंदाज करना यह जनप्रतिनिधियों की शैली बन चुकी है। चुनाव के समय भले ही बड़े-बड़े वादे किए हो लेकिन चुनाव पश्चात यहां की समस्या को लेकर कोई भी जनप्रतिनिधि गंभीर नजर नहीं आता है।