'14 दिन की जंग में ही दुनिया के सामने भीख मांगने लगा अमेरिका', ईरान ने ट्रंप के दावे पर क्या कुछ कहा?

US-Iran Conflict: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा है कि मात्र 14 दिन की जंग में उनके मुल्क ने अमेरिका से भीख मंगवा दी है। आज अमेरिका दुनिया के सामने गिड़गिड़ा रहा कि वे रूस से तेल खरीदे।
'America Began Begging the World After Just 14 Days of War'—What Did Iran Say in Response to Trump's Claim?
अब्बास अरागची (Image- Social Media)
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Iran-America War: अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के साथ-साथ बयानबाजी भी काफी तेज हो गई है। ईरान के खर्ग द्वीप को तबाह करने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे के बीच तेहरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान ने तंज कसते हुए कहा कि महज 14 दिन की जंग में ही अमेरिका को दुनिया के सामने “भीख मांगने” की स्थिति में ला दिया गया है। ईरान का यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका ने कई देशों से रूस से तेल खरीदने की अपील की है, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती तेल कीमतों को नियंत्रित किया जा सके।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि अमेरिका कई महीनों से भारत पर रूस से तेल न खरीदने का दबाव बना रहा था। लेकिन ईरान के साथ दो हफ्ते की जंग के बाद व्हाइट हाउस अब भारत समेत दुनिया के अन्य देशों से रूस से तेल खरीदने की अपील कर रहा है।

यूरोपीय देशों पर भी बोला हमला

अरागची ने यूरोपीय देशों को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि कुछ यूरोपीय देश अमेरिका के “अवैध युद्ध” का समर्थन कर रहे हैं और उन्हें लगता है कि इससे वे रूस के खिलाफ वाशिंगटन का समर्थन हासिल कर लेंगे। उनके मुताबिक यह सोच पूरी तरह गलत है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान के साथ एक रिपोर्ट भी साझा की। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से रूस को बड़ा आर्थिक फायदा हो रहा है और उसकी आय में बढ़ोतरी हुई है।

रूसी तेल खरीदने की छूट

अरागची के इस बयान से पहले ही ट्रंप प्रशासन ने दुनिया के देशों को रूस से तेल खरीदने पर 30 दिनों की अस्थायी छूट देने का ऐलान किया था। पिछले सप्ताह अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा था कि वाशिंगटन ने भारत को समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीदने की अनुमति दी है, ताकि वैश्विक तेल बाजार में आपूर्ति बढ़ाई जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने पहले अमेरिका के अनुरोध पर रूस से तेल खरीद कम करने में सहयोग किया था, इसलिए अब उसे अस्थायी राहत दी जा रही है।

यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। ईरान के साथ युद्ध और Strait of Hormuz में बाधा के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेजी देखी जा रही है।

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