Gondia News: पिछले 5 सालों में जिले की स्थिति यह थी कि हरेभरे जंगल में लोग आराम से चलफिर सकते थे.लेकिन यह 4 साल पहले बदल गया, अब यह मामला नहीं है.4 साल से जिले में बाघ, तेंदुआ और भालुओं की संख्या में इजाफा हुआ है और जंगल ही नहीं, खेतों में भी जाना खतरनाक होता जा रहा है.
महुआ फूल चुनने का कार्य शुरू हुआ है.सुबह से ही महुआ फूल चुचने के लिए ग्रामीण लोग जा रहे हैं.लेकिन इसके लिए जंगल जाने वालों पर खूंखार जंगली जानवरों के हमले की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता.
इसी के चलते वन विभाग ने नागरिकों से आव्हान किया है कि महुआ फूल चुनते समय सावधानी बरतने की जरूरत है.गोंदिया जिला वन संसाधनों से आच्छादित है और कई तहसील काफी हद तक वनों से आच्छादित हैं.
लेकिन कृषि तटबंधों और सड़कों के किनारे जंगल के साथसाथ जिले में बड़ी संख्या में महुए के पेड़ हैं.किसान खेतिहर मजदूरों के साथ जंगलों और खेत बांधों से महुआ फूल चुनने के लिए जाते हैं.आमतौर पर महुआ फूल चुनने का कार्य मार्च महीने से ही शुरू हो जाता है.
यह ऋतु लगभग एक माह तक चलता है जो अप्रैल माह तक जारी रहती है.बढ़ रहे जनहानि के खतरें किसान सुबह से ही खेत परिसर या वन क्षेत्र में फूल चुनने के लिए जाते हैं.5 साल पहले नागरिक फूल लेने के लिए कहीं भी जा रहे थे.
लेकिन पिछले 4 वर्षों से जिले में बाघ और तेंदुए के हमले ने एक भयावह स्थिति पैदा कर दी है.कोई भी नागरिक तड़के या देर शाम तक फूल लेने के लिए खेत में जाने की हिम्मत नहीं करता है.जंगल में खूंखार जानवरों के कारण कई लोगों की जान जा चुकी है.
विशेष बात यह है कि वन विभाग नागरिकों को तड़के जंगल में नहीं जाने और फूलों को इकट्ठा करने में सतर्कता बरतने के प्रति जागरूक कर रहा है.वन विभाग ने दोपहर 3 बजे के भीतर लौटने का भी अनुरोध किया है.