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वघाला हुआ वीरान, शुरू हुआ पक्षियों की घर-वापसी का सिलसिला, क्षेत्र के संवर्धन की जरूरत

Wainganga River Birds: वघाला गांव में स्थलांतरित पक्षियों की घर-वापसी शुरू हो गई है। क्षेत्र को पक्षी पर्यटन स्थल का दर्जा न मिलने से विकास प्रभावित है।

  • By आंचल लोखंडे
Updated On: Nov 16, 2025 | 06:58 PM

शुरू हुआ पक्षियों की घर-वापसी का सिलसिला (सौजन्यः सोशल मीडिया)

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Waghala Migratory Birds: आरमोरी तहसील मुख्यालय से महज 5 किमी दूर स्थित ग्राम वघाला स्थलांतरित पक्षियों के लिए पूरे जिले में प्रसिद्ध है। गांव के पास बहने वाली वैनगंगा नदी में पर्याप्त भोजन उपलब्ध होने और लगभग 60 से अधिक इमली के पेड़ों की उपस्थिति के कारण हर वर्ष जुलाई माह में यहां बड़ी संख्या में स्थलांतरित पक्षी पहुंचते हैं। लेकिन जैसे ही नवंबर माह शुरू होता है, इन पक्षियों की घर-वापसी शुरू हो जाती है। वर्तमान में पक्षियों के पलायन के चलते वघाला गांव फिर से वीरान होने लगा है और इमली के पेड़ों से उनकी किलबिलाहट गायब हो गई है।

गांव की आबादी लगभग 500 है और यहां 60 से अधिक पुराने इमली के पेड़ मौजूद हैं। वैनगंगा नदी के घाट पर विभिन्न प्रकार की मछलियां मिलने से कई प्रजातियों के पक्षी प्रतिवर्ष यहां आते हैं। ग्रामीणों के अनुसार इस वर्ष जून के अंतिम सप्ताह में ब्लॉक चोच, सफेद कंकर, छोटा पानकौवा, मध्यम बगुला, गाय बगुला, लाल बगुला, राखी बगुला, सफेद सराटी, कारकौंचा, चित्र बलाक, काला कौंवा, चक्रवाक तथा अन्य प्रजातियों के पक्षी वघाला पहुंचे थे।

पक्षियों की चहचहाहट पड़ी कम

यह पक्षी इमली के पेड़ों पर घोंसले बनाकर जून से अक्टूबर तक नदी में भोजन ढूंढते हैं और इसी दौरान अंडे देते हैं। नवंबर शुरू होते ही अंडों से चूजे निकलने लगते हैं और तभी पक्षियों के पलायन की प्रक्रिया भी शुरू हो जाती है। वर्तमान में अधिकांश प्रजातियों के पक्षी लौटने लगे हैं, जिसके कारण गांव में पिछले दिनों तक गूंजती किलबिलाहट अब सुनाई नहीं दे रही।

हर वर्ष वघाला के इमली के पेड़ों पर लगभग 10 से 12 हजार चूजों का जन्म होता है। इसके बावजूद अब तक सरकार की ओर से इस क्षेत्र के संवर्धन पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिसके चलते वघाला आज भी विकास से वंचित है।

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वघाला को नहीं मिला पक्षी पर्यटन क्षेत्र का दर्जा

कई वर्षों से वघाला गांव में स्थलांतरित पक्षियों का आगमन होता रहा है। स्थानीय लोगों ने इनके संरक्षण के लिए बड़े पैमाने पर इमली के पेड़ों का रोपण भी किया है। जून से नवंबर तक यहां पक्षियों को देखने पर्यटकों की भारी संख्या रहती है। इसके बावजूद वघाला को अब तक पक्षी पर्यटन स्थल का दर्जा नहीं मिला। पर्यटन स्थल का दर्जा न मिलने के कारण स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर नहीं मिल पाए। पर्यटकों की व्यवस्था भी ग्रामीणों को स्वयं करनी पड़ती है। यदि वघाला को पक्षी पर्यटन क्षेत्र घोषित किया जाए, तो न केवल स्थानीय लोगों के लिए रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे बल्कि स्थलांतरित पक्षियों के संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

Waghala migratory birds return need for conservation tourism status

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Published On: Nov 16, 2025 | 06:58 PM

Topics:  

  • Gadchiroli News
  • Maharashtra
  • Migratory Birds

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