1000 से अधिक गांवों में छिड़काव (सौजन्य-नवभारत)
Gadchiroli News: बरसात में जुलाई से सितंबर के अवधि में जिले के दुर्गम, ग्रामीण अंचल में मलेरिया समेत अनेक संक्रमित बीमारियों की संभावना अधिक होती है। जिले के स्वास्थ्य विभाग को इसका प्रतिवर्ष का अनुभव है। जिले के कुछ दुर्गम क्षेत्र में बढ़ता मलेरिया का प्रकोप ध्यान में लेते हुए इस वर्ष भी स्वास्थ्य विभाग ने तत्परता दिखाने से संक्रमित बीमारी पर नियंत्रण पाने में व्यापक मात्रा में सफलता मिली है।
जिले के अधिकांश गांव वनव्याप्त है। गांवों के आस पास धान की खेती होती है। इस खेतों में पानी जमा रहने के साथ दुर्गम, ग्रामीण अंचल में गंदा पानी बहकर जाने के लिए स्थानीय स्तर पर व्यापक उपाययोजना नहीं किए जाने से बड़े पैमाने पर मच्छरों की उत्पति होती है। वहीं वनव्याप्त गांवों की बिजली आपूर्ति निरंतर बंद रहती है। इस परिसर के नागरिक मच्छरदानी का भी व्यापक उपयोग नहीं करते है।
इससे बड़े पैमाने पर मच्छरों के काटने से मलेरिया का प्रकोप बढ़ता है। यह प्रकोप करीब सितंबर तक कायम रहता है। अनेक मरीज अंतिम स्टेज पर अस्पताल में दाखिल होने से समय पर स्वास्थ्य विभाग को भी परेशानी होती है। यह मामला टालने के लिए स्वास्थ्य विभाग प्रतिवर्ष सतर्क रहा है। जिससे ऐसे संवेदनशील गांवों को सबसे पहले प्राथमिकता देते हुए छिड़काव किए जाने की जानकारी मलेरिया विभाग ने दी है।
मलेरिया के दृष्टि से संवेदनशील होने वाले 29 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के 1 हजार 242 गांवों में से करीब 1 हजार से 1050 गांवों में मलेरिया प्रतिबंधक छिड़काव पूर्ण हुआ है। छिड़काव का प्रतिशत करीब 95 प्रश के आस पास है। छिड़कांव कार्य के लिए विशेष 23 दस्ते गठित किए गए है। एक दस्ते में 6 कर्मचारियों का समावेश है।
स्वास्थ्य विभाग के स्वास्थ्य सेवकों के अनेक पद रिक्त है। वहीं नियमित कार्य संभालकर मलेरिया प्रतिबंध का कार्य करना कठिन होता है। जिससे जिला मलेरिया नियंत्रण विभाग ने 127 मौसमी क्षेत्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति की है। उक्त कर्मचारी प्रत्येक घर जाकर मलेरिया प्रतिबंध के लिए प्रयास कर रहे है।
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जिलेभर में 4 लाख से अधिक मच्छरदानी वितरण का नियोजन स्वास्थ्य विभाग ने किया है। खासकर मलेरिया का सर्वाधिक खतरा होने वाले स्वास्थ्य केंद्र के गांव में तत्काल मच्छरदानी के विचरण की शुरुआत की गई। इसमें प्रमुखता से भामरागड़, कोरची तहसील के संवेदनशील गांव के नागरिकों को अब तक 50 हजार से अधिक मच्छरदानियों का वितरण किया गया है।
इस संदर्भ में जिला मलेरिया नियंत्रण अधिकारी डा. पंकज हेमके ने बताया कि डेंगू, मलेरिया का प्रकोप न बढ़े, इसलिए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। विशेष टास्क फोर्स के नेतृत्व में स्वास्थ्य कर्मचारी युद्ध स्तर पर कार्यरत है। गांव-गांव में जनजागृति के साथ अनेक प्रतिबंधात्मक उपाययोजना की जा रही है। जिला स्तर पर कंट्रोल रूम भी तैयार की गई है। नागरिक बरसात की अवधि में मच्छरों की उत्पत्ति न बढ़े, इसके लिए विशेष सतर्कता बरतने के साथ अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखे।