गड़चिरोली में धान की बुआई टली, किसानों की बढ़ी चिंता, जोरदार बारिश का इंतजार
Gadchiroli Farming News Update: गड़चिरोली में पर्याप्त बारिश न होने से धान की बुआई टल गई है। खरीफ की तैयारी पूरी कर चुके किसान अब जोरदार वर्षा का इंतजार कर रहे हैं।
- Written By: अनन्या तिवारी
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स-AI)
Farmers Wait For For Heavy Rainfall In Gadchiroli: खरीफ सीजन की तैयारियां पूरी कर चुके गड़चिरोली जिले में चामोर्शी के किसान अब अच्छी बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। जून का तीसरा सप्ताह शुरू हो चुका है, लेकिन जिले में अब तक संतोषजनक वर्षा नहीं होने से खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बन पाई है। इसके चलते चामोर्शी समेत पूरे जिले में धान की बुआई टलने की आशंका बढ़ गई है और किसानों की चिंता गहरा गई है।
पिछले वर्ष 15 से 18 जून के बीच अच्छी बारिश होने के कारण अनेक किसानों ने आर्द्रा नक्षत्र में धान की बुआई कर ली थी। इस बार बारिश की कमी ने किसानों को असमंजस की स्थिति में ला खड़ा किया है। गड़चिरोली जिले में अधिकांश किसान धान की खेती करते हैं, जबकि अहेरी, सिरोंचा और आष्टी क्षेत्र में कपास की खेती भी बड़े पैमाने पर की जाती है।
प्रसारण और रोपाई दोनों पद्धतियां प्रचलित
जिले में धान उत्पादन के लिए प्रसारण (आवत्या) और रोपाई (रोवणी) दोनों पद्धतियां अपनाई जाती हैं। मजदूरों की कमी और बढ़ती लागत के कारण पिछले कुछ वर्षों में करीब 50 प्रतिशत किसान प्रसारण पद्धति को प्राथमिकता दे रहे हैं। वहीं रोपाई पद्धति के लिए पहले धान की नर्सरी तैयार करनी पड़ती है और पर्याप्त वर्षा होने के बाद खेतों में रोपाई की जाती है।
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किसानों का कहना है कि वर्षा की अनियमितता के कारण हर साल खेती की योजनाएं प्रभावित हो रही हैं, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है। जिले के कई क्षेत्र अब भी सिंचाई सुविधाओं से वंचित हैं, जिससे खेती पूरी तरह मानसून पर निर्भर बनी हुई है।
बीज तैयार, बारिश का इंतजार
कई किसानों ने खरीफ सीजन के लिए बीज खरीदकर रख लिए हैं, जबकि कुछ किसान घर में संग्रहित बीजों की सफाई और धूप में सुखाने का काम कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि अच्छी बारिश के बाद ही खेतों में पर्याप्त नमी बनेगी और बुआई कार्य शुरू हो सकेगा। हालांकि, बुआई में अधिक देरी होने पर उत्पादन घटने की आशंका भी बढ़ रही है।
खेती की तैयारियां लगभग पूरी
किसानों ने खेतों की जुताई, मेड़बंदी, सफाई तथा अन्य अंतर-खेती कार्य लगभग पूरा कर लिया है। कई किसान तेज धूप के बावजूद खेती की अंतिम तैयारियों में जुटे हुए हैं। कुछ स्थानों पर ट्रैक्टरों की मदद से खेत तैयार किए जा रहे हैं। बढ़ती मांग के चलते ट्रैक्टर का किराया करीब एक हजार रुपये प्रति घंटा तक पहुंच गया है। किसानों को समय पर ट्रैक्टर उपलब्ध कराने के लिए मालिकों से विशेष अनुरोध करना पड़ रहा है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार समय पर बुआई होने से फसलों की वृद्धि बेहतर होती है और उत्पादन में बढ़ोतरी होती है। लेकिन वर्षा में देरी के कारण बुआई टलने से फसल की वृद्धि अवधि कम हो सकती है, जिससे उत्पादन प्रभावित होने की संभावना रहती है।
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मौसम विभाग का अनुमान भी नहीं हुआ सटीक
मौसम विभाग ने 15 जून तक जिले में अच्छी वर्षा की संभावना जताई थी, लेकिन निर्धारित अवधि बीत जाने के बावजूद जोरदार बारिश नहीं हुई। इससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है। अब जिले भर के किसानों की निगाहें आसमान पर टिकी हैं और वे मानसून की सक्रियता का इंतजार कर रहे हैं।
