El Nino और जल संकट से निपटने की दिशा में गड़चिरोली का बड़ा कदम, 18,750 टीएमसी वॉटर स्टोरेज निर्मित
Water Conservation: गड़चिरोली जिले में पिछले दो वर्षों में 6,015 जलसंरक्षण कार्य पूरे किए गए हैं। इनसे 18,750 टीएमसी जल भंडारण क्षमता विकसित हुई है, जिससे भूजल पुनर्भरण और जल सुरक्षा को मजबूती मिली है
- Written By: अनन्या तिवारी
जल संरक्षण की प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स-AI)
Water Conservation Initiatives In Gadchiroli: गड़चिरोली जिले में पिछले दो वर्षों के दौरान सरकारी योजनाओं के माध्यम से बड़े पैमाने पर जलसंरक्षण कार्य किए गए हैं। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप जिले में उल्लेखनीय जल भंडारण क्षमता विकसित हुई है और ग्राउंड वॉटर रीचार्ज को भी बढ़ावा मिला है। संभावित अल नीनो परिस्थितियों के कारण भविष्य में कम वर्षा या जल संकट जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए ये कार्य महत्वपूर्ण साबित होंगे
18,750 टीएमसी वॉटर स्टोरेज क्षमता का निर्माण
जिले में अब तक कुल 6,015 जलसंरक्षण कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं, जिनसे 18,750 टीएमसी जल भंडारण क्षमता विकसित हुई है। वहीं, वर्तमान में प्रगति पर चल रहे कार्यों के पूर्ण होने के बाद अतिरिक्त 2,060 टीएमसी जल भंडारण क्षमता का निर्माण होने की उम्मीद है।
विभिन्न संरचनाओं का व्यापक निर्माण
पूर्ण किए गए कार्यों में 1,329 बोडी गहरीकरण, 767 फलोद्यान रोपण, 1,064 खेत तालाब, 323 गेबियन बांध, 387 रिचार्ज शाफ्ट और 207 कोल्हापुरी बांध शामिल हैं। इसके अलावा वन क्षेत्रों में वनराई बांध, वन तालाब और एलबीएस जैसे मृदा एवं जलसंरक्षण कार्य भी किए गए हैं। इन प्रयासों से वर्षा जल का अधिकतम संचयन संभव हुआ है तथा भूजल स्तर में सुधार के सकारात्मक संकेत मिले हैं।
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जलयुक्त शिवार अभियान 2.0 में 4,638 कार्य पूर्ण
जलयुक्त शिवार अभियान 2.0 के अंतर्गत जिले में 4,638 कार्य पूरे किए गए हैं, जिनसे 9,340 टीएमसी जल भंडारण क्षमता विकसित हुई है। इस योजना के तहत बोडी गहरीकरण, खेत तालाब, मजगी, गेबियन बांध, वनराई बांध, रिचार्ज शाफ्ट, सीमेंट नाला बांध और तालाब मरम्मत जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी गई।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना से बढ़ी क्षमता
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) 2.0 के तहत जिले में 1,042 कार्य प्रस्तावित किए गए हैं। इनमें बड़ी संख्या में खेत तालाब, मजगी, गेबियन बांध, डीप सीसीटी और एलबीएस कार्य पूर्ण हो चुके हैं। इन कार्यों से अब तक 5,200 टीएमसी जल भंडारण क्षमता का निर्माण हुआ है।
तालाबों से निकाली गई लाखों घनमीटर गाद
जिला खनिज प्रतिष्ठान निधि (DMF), गादमुक्त बांध-गादयुक्त शिवार योजना, जिला वार्षिक योजना तथा जिला वार्षिक आदिवासी उपयोजना के माध्यम से भी जलसंरक्षण के महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं। गादमुक्त बांध-गादयुक्त शिवार योजना के अंतर्गत तालाबों और जलाशयों से लाखों घनमीटर गाद निकाली गई, जिससे उनकी जल भंडारण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
जिला वार्षिक योजना के माध्यम से 5,319 टीएमसी तथा जिला वार्षिक आदिवासी उपयोजना के तहत 1,818 टीएमसी अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता विकसित की गई है।
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लंबित कार्य शीघ्र पूरे करने के निर्देश
गड़चिरोली जिलाधिकारी अविश्यांत पंडा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और संभावित अल नीनो की स्थिति को देखते हुए जल सुरक्षा का महत्व पहले से अधिक बढ़ गया है। पिछले दो वर्षों में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से निर्मित जल भंडारण क्षमता और भूजल पुनर्भरण व्यवस्था भविष्य में संभावित जल संकट के प्रभाव को कम करने में सहायक सिद्ध होगी।
उन्होंने बताया कि लंबित जलसंरक्षण कार्यों को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का मुख्य लक्ष्य वर्षा की प्रत्येक बूंद का संरक्षण कर कृषि, पेयजल उपलब्धता और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखना है।
अल नीनो की चुनौतियों से निपटने में मिलेगी मदद
विशेषज्ञों के अनुसार जिले में विकसित यह व्यापक जलसंरक्षण व्यवस्था केवल वर्षा जल संचयन तक सीमित नहीं है, बल्कि भूजल स्तर बढ़ाने, सिंचाई क्षमता मजबूत करने और ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। संभावित अल नीनो परिस्थितियों के मद्देनजर गड़चिरोली जिले की यह पहल भविष्य की जल चुनौतियों से निपटने के लिए एक मजबूत आधार साबित हो सकती है।
