Kurkheda Agriculture Department News: कुरखेड़ा बारिश के दिनों में खाद की कालाबाजारी होने की गंभीर संभावना होती है। इन दिनों सभी किसानों को खाद की बेहद आवश्यकता होती है। जिले में खाद का आवंटन मंजूर होते हुए भी और कुछ जगह पर आवश्यकता अनुसार खाद होते हुए भी किसानों को खाद की किल्लत का सामना करना पड़ता है। आगामी खरीफ सत्र में किसानों को इस समस्या का सामना न करना पड़े, इसलिए कृषि विभाग ने कृषि केंद्रों की जांच अभी से ही शुरू कर दी है।
ऐसे में कुरखेड़ा में जांच में प्रत्यक्ष भंडार व ईपॉस मशीन पर दिखाया गया भंडार में तालमेल नहीं जुड़ने से खाद बिक्री बंद करने का आदेश कृष विभाग के उड़न दस्ते ने दिया है। जिससे तहसील में खलबली मच गई है। खाद की कालाबाजारी पर नियंत्रण रखने के लिए कृषि विभाग द्वारा उड़न दस्ते का गठन किया जाता है।
शिकायत हो या न हो उड़न दस्ते जांच करते है। लेकिन खरीफ सत्र में जिस जगह पर बड़े पैमाने पर खाद की किल्लत निर्माण होती है, उस जगह पर खाद की किल्लत क्यों निर्माण होती है इसका संज्ञान कोई लेते नहीं दिखाई दे रहा है। कुछ जगहों पर उड़न दस्ते द्वारा कार्रवाई की जाती है।
ऐसे में आगामी सत्र में खाद की किल्लत निर्माण न हो, इसलिए अभी से ही मुहिम शुरू है। तहसील के कृषि विभाग के पथक ने खाद का भंडार जांच करना शुरू किया है। कुरखेड़ा तहसील से भंडारा और गोंदिया जिले की सीमा सटी है।
इन दोनों जिलों में बड़े पैमाने पर रबी सत्र में धान का उत्पादन लिया जाता है। जिससे खाद की मांग अधिक होती है। प्रत्येक जिलों में खाद का नियोजन किए जाने के बाद भी करीबी कृषि केंद्र से खाद मिलने पर वहां से खाद कैसे खरीदे ऐसा सवाल किसानों के सामने निर्माण होता है।
कृषि विभाग का दस्ता अलर्टकुरखेड़ा के खाद बिक्री केंद्रों को भेंट देकर प्रत्यक्ष भंडार व ईपॉस मशीन के भंडार की जांच की गई। इसमें कुछ जगहों पर एक ही किसान के नाम पर अधिक का खाद देने की बात सामने आयी है।
इसके साथ ही प्रत्यक्ष भंडार व ईपॉस मशीन की जानकारी नहीं जुड़ पाने से उन्हें खाद बिक्री बंद करने का आदेश दिया गया है। इस समय कृषि अधिकारी किरण खोमणे, गुणनियंत्रण निरीक्षक संजय रामटेके समेत देसाईगंज, आरमोरी व गड़चिरोली के कृषि विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।