Gadchiroli Water Problem (सोर्सः सोशल मीडिया)
Jhinganur Village Water Crisis: भले ही सरकार और प्रशासन राज्य के अंतिम छोर पर बसे गड़चिरोली जिले के ग्रामीण एवं दुर्गम क्षेत्रों के विकास के दावे कर रहे हों, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है। जिले के अंतिम छोर पर स्थित सिरोंचा तहसील के अंतर्गत आने वाले झिंगानुर गांव में पिछले कई वर्षों से गंभीर जलसंकट बना हुआ है।
प्रशासन द्वारा की गई विभिन्न योजनाओं के बावजूद ये उपाय झिंगानुरवासियों के लिए प्रभावी साबित नहीं हो पा रहे हैं। परिणामस्वरूप, ग्रीष्मकाल से पहले ही गांव में जलसंकट की स्थिति निर्मित हो गई है। हैरानी की बात यह है कि शीतकाल में ही यहां पानी की समस्या गहराने लगी है।
करीब 3 हजार की आबादी वाले झिंगानुर ग्राम पंचायत क्षेत्र में जैसे ही ग्रीष्मकाल की आहट महसूस होती है, वैसे ही जलस्रोत सूखने लगते हैं। वर्तमान स्थिति में गांव के अधिकांश हैंडपंप सूख चुके हैं, वहीं कुओं का जलस्तर भी तेजी से घट गया है। इसके चलते छोटे बच्चों सहित महिलाओं और बुजुर्गों को पीने के पानी के लिए भटकना पड़ रहा है।
इस गांव में पुलिस सहायता केंद्र, वन विभाग कार्यालय, आश्रमशाला, जिला परिषद स्कूल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जैसी महत्वपूर्ण शासकीय सुविधाएं मौजूद हैं, इसके बावजूद भी ग्रामीण आज तक पानी जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं। शुद्ध पेयजल की अनुपलब्धता के कारण नागरिकों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
स्थिति को देखते हुए यह आशंका जताई जा रही है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो ग्रीष्मकाल में जलसंकट और अधिक विकराल रूप धारण कर सकता है। ग्रामीणों द्वारा प्रशासन से इस ओर गंभीरता से ध्यान देकर तत्काल एवं स्थायी उपाययोजना करने की मांग की जा रही है।
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झिंगानुर गांव में जलसंकट के चलते नागरिकों को मजबूरी में दूषित पानी का सेवन करना पड़ रहा है। इससे विभिन्न बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ गई है। विशेषकर ग्रीष्मकाल के दौरान पानी की समस्या अत्यंत गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों द्वारा बार-बार प्रशासन से समाधान की मांग की जा रही है, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते अब तक कोई स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकी है।