गड़चिरोली में जलसंकट (सौजन्य-नवभारत)
Water Crisis: गड़चिरोली जिले में बीते कुछ दिनों से सूरज आग उगल रहा है, जिससे तपिश बढ़ने लगी है। जिले के जलाशय सूखने लगे हैं। बढ़ती तपिश के चलते वाष्पीकरण की गति भी बढ़ने लगी है। जिसके चलते जिले के बांधों में 1 अप्रैल की रिपोर्ट के तहत 59.20 प्रश उपलब्ध है। जिससे जिले में जलाशय व बांध समेत विभिन्न मुख्य, मध्यम तथा लघु प्रकल्पों में करीब 55 से 60 प्रश पानी उपलब्ध होने की जानकारी है।
जिले में गर्मी के मद्देनजर बांधों का जलस्तर घट रहा है, ऐसे में आगामी दिनों में पानी की समस्या जटिल होने की संभावना व्यक्त हो रही है। गड़चिरोली जिला वन संपन्न होने के साथ ही जल संपन्न भी है। जिले की सीमाओं पर वैनगंगा, प्राणहिता, इंद्रावती व गोदावरी ऐसी बड़ी नदियां बहती हैं, इसके साथ ही जिले में अंतर्गत अनेक नदियां बहती हैं, लेकिन जिले में बांधों का अभाव है।
ऐसे में जिले में गर्मी के दिनों में पानी की समस्या (Water Crisis) निर्माण होती है। वहीं बांध के अभाव में गर्मी के दिनों में अनेक हेक्टेयर खेती सूखी रहती है। कुछ किसान उपलब्ध सिंचाई सुविधा के माध्यम से खेती करते हैं, लेकिन उन्हें भी व्यापक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। गड़चिरोली जिले में एकमात्र बड़ा प्रकल्प होने वाले दिना प्रकल्प में 59 प्रश उपयुक्त जलसंग्रहण होने की जानकारी है।
इस जलाशय पर इस परिसर के अनेक किसान निर्भर है। गड़चिरोली जिले के चामोर्शी में वैनगंगा नदी पर चिचडोह प्रकल्प निर्माण किया गया है। इस मध्यम प्रकल्प में करीब 64 प्रश पानी उपलब्ध है। जिले के कुल बड़े तथा मध्यम प्रकल्पों की स्थिति देखते तो औसतन करीब 55 से 60 प्रश पानी शेष है। इस पानी के भरोसे ही धूपकालीन खेती तथा अनेक नलयोजना भी निर्भर है।
गड़चिरोली जिले के लघु प्रकल्पों की स्थिति काफी विकट है। करीब 15 से अधिक लघु प्रकल्प तथा तालाबों में 59 प्रश से कम पानी होने की जानकारी है। सबसे कम 15 प्रश पानी पेंटीपाका, अमराजी में 20 प्रश, येंगलखेड़ा में 31 प्रश पानी है। वहीं कोसरी के लघु प्रकल्प में 42 प्रश, कुनघाड़ा के तालाब में 47 प्रश पानी है। इसके साथ ही जिले के अनेक तालाबों में 50 प्रश से कम पानी है। केवल कुछ तालाबों में भी 50 प्रश से कुछ अधिक जलसंग्रहण है।
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गड़चिरोली जिले में नदी, नाले तथा तालाबों पर अनेक जलापूर्ति योजना स्थित है। गर्मी के दिनों में जलाशय सूखने के कारण ग्रामीण अंचल की अनेक जलापूर्ति योजनाएं प्रभावित होती हैं। जिससे नागरिकों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ता है।
जिले के दुर्गम क्षेत्रों में जलापूर्ति की स्थिति गंभीर है। यहां के नागरिकों को गर्मी के दिनों में पानी के लिए काफी परेशानी होती है। नल योजनाएं प्रभावित होती हैं, वहीं कुएं व हैन्डपंप का जलस्तर घटने से दूरदराज से पानी लाना पड़ता है।
किसान तुलसीराम गोहणे ने कहा तपिश बढ़ रही है, जिससे प्रकल्पों का जलस्तर घट रहा है, ऐसे में बांध व जलाशयों का जलस्तर भी कम हो रही है। जिले के बांधों में 55 से 60 प्रश ही पानी है, वहीं लघु प्रकल्पों में 50 प्रश से कम जलसंग्रहण होने के चलते इसका नुकसान धूपकालीन फसलों को लगने की संभावना है। जिससे किसानों में चिंता है। जिले में बांधों का अभाव है, जिससे सिंचाई सुविधा नहीं मिलने से अनेक किसानों को अपनी जमीने सूखी रखनी पड़ रही है। जिससे जिले में बहने वाली नदियों पर बांध निर्माण करना जरूरी है।