भिक्षामुक्त महाराष्ट्र (सौ. सोशल मीडिया )
Maharashtra Beggar Issue: महाराष्ट्र में बढ़ रही भिखारियों की संख्या को लेकर महाराष्ट्र राज्य अन्न आयोग ने राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। आयोग ने प्रदेश को भिक्षामुक्त बनाने के लिए ठोस और प्रभावी उपाय लागू करने की आवश्यकता जताई है।
आयोग की रिपोर्ट में बताया गया है कि कई पात्र लोग सरकारी योजनाओं से वंचित हैं और पुनर्वास कार्यक्रम प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो पा रहे हैं। जिला स्तर पर निगरानी व्यवस्था कमजोर है, जबकि बायोमेट्रिक सिस्टम में भी तकनीकी समस्याएं सामने आ रही हैं।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 और भिक्षावृत्ति प्रतिबंध कानून लागू होने के बावजूद सार्वजनिक स्थानों पर भिखारियों की संख्या बढ़ना चिंता का विषय है। आयोग ने सुझाव दिया है कि यदि बायोमेट्रिक सिस्टम प्रभावी नहीं है, तो वैकल्पिक पहचान प्रणाली लागू की जानी चाहिए।
आयोग ने ‘भीख मत दो, पुनर्वास में सहयोग करो’ जैसे राज्यव्यापी जनजागरण अभियान चलाने की सिफारिश की है। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, मंदिर और अन्य भीड़भाड़ वाले स्थानों पर हेल्पलाइन नंबर प्रचारित करने पर भी जोर दिया गया है।
आयोग ने इंदौर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कानून के सख्त पालन, जनजागरण और पुनर्वास के माध्यम से भिक्षावृत्ति पर काफी हद तक नियंत्रण पाया गया है। इसी तरह के उपाय महाराष्ट्र में भी लागू किए जाने चाहिए।
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Maharashtra में वर्तमान में 24 हजार से अधिक लोग भीख मांगकर जीवन यापन कर रहे हैं। आयोग ने जिलाधिकारियों को सक्रिय भूमिका निभाने और अन्य राज्यों के भिखारियों को उनके मूल राज्य में भेजने जैसे कदम उठाने की भी सिफारिश की है।