गड़चिरोली जिले के दुर्गम क्षेत्रों में बसों का अभाव, निजी वाहनों में सफर करने को मजबूर, यात्री समेत विद्यार्थी
Gadchiroli Bus Service: गड़चिरोली के दुर्गम गांवों में बस सेवा के अभाव के कारण ग्रामीणों और विद्यार्थियों को निजी वाहनों से जोखिम भरा सफर करना पड़ रहा है, जिससे सुरक्षित परिवहन की मांग तेज हो गई है।
- Written By: आंचल लोखंडे
MSRTC Bus Shortag (सोर्सः सोशल मीडिया)
Gadchiroli Public Transport Shortage: राज्य के अंतिम छोर पर बसे जिले के ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों तक अब तक आवश्यक परिवहन सुविधाएं नहीं पहुंच पाई हैं। वर्तमान स्थिति में इन क्षेत्रों के अनेक गांवों तक महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन महामंडल (रापनि/MSRTC) की बसें नहीं पहुंच रहीं, जिसके कारण यात्रियों को निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
विशेष रूप से कई ग्रामीण और दुर्गम गांवों में दिनभर में केवल एक ही बस पहुंचती है। इसके चलते लोगों को घंटों बस की प्रतीक्षा करनी पड़ती है। कई बार बस उपलब्ध नहीं होने के कारण क्षेत्र के नागरिकों को मजबूरन निजी वाहनों से सफर करना पड़ रहा है।
निजी वाहनों में सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं
निजी वाहनों में सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं होने के बावजूद बस सेवा के अभाव में लोगों को जोखिम भरा सफर करना पड़ रहा है। संबंधित विभाग, प्रशासन और सरकार द्वारा दुर्गम क्षेत्रों में बस सेवा उपलब्ध कराने की दिशा में पर्याप्त ध्यान नहीं दिए जाने से ग्रामीण नागरिक वर्षों से अपनी जान जोखिम में डालकर यात्रा कर रहे हैं।
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नागरिकों को सुरक्षा की चिंता
ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में चलने वाले निजी वाहनों में सुरक्षा की कोई सुनिश्चित व्यवस्था नहीं होती। इसके बावजूद यही वाहन यात्रियों के लिए एकमात्र विकल्प बने हुए हैं। काली-पीली टैक्सी, टाटा सूमो, टेम्पो और अन्य निजी जीपों का उपयोग आवागमन के लिए किया जा रहा है।
निजी वाहन चालकों द्वारा यात्रियों की सुरक्षा को लेकर अपेक्षित गंभीरता नहीं बरती जा रही है। कई मामलों में वाहनों में क्षमता से अधिक यात्रियों को ठूंसकर ले जाया जाता है, जिससे यात्रियों की जान को खतरा बना रहता है।
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कब मिलेगी यातायात की सुविधा
ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में बसों की कमी के कारण नागरिकों को निजी वाहनों से यात्रा करनी पड़ रही है। निजी वाहन चालकों की मनमानी के चलते यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अनेक बार पुलिस को देखते ही निजी वाहन चालक यात्रियों को बीच रास्ते में उतार देते हैं।
इसके अलावा निजी वाहनों में खराबी आने की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं, जिससे यात्रियों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। इस स्थिति से ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्र के यात्री पूरी तरह त्रस्त हो चुके हैं। अब क्षेत्र के लोग सवाल उठा रहे हैं कि उन्हें सुरक्षित और नियमित यातायात सुविधा आखिर कब उपलब्ध होगी।
