प्रचार के लिए मजदूरों की एडवांस बुकिंग शुरू, चुनावी मौसम में हाई डिमांड, गुटबाजी का भी दिखा असर
Gadchiroli Nagar Parishad Election: गड़चिरोली नप चुनाव में मजदूरों की भारी मांग, रैलियों में भीड़ जुटाने के लिए एडवांस बुकिंग शुरू। निर्माण–कृषि काम ठप, गुटबाजी से उम्मीदवारों को नुकसान।
- Written By: प्रिया जैस
मजदूरों की डिमांड (सौजन्य-नवभारत)
Rally Crowd Management: नप चुनाव का प्रचार समाप्त होने में अब महज 3 दिन का समय शेष होने से उम्मीदवारों की जोरदार भागदौड़ शुरू हो गई है। हर प्रत्याशी अधिक से अधिक मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है, मगर प्रचार का दबाव इतना बढ़ गया है कि कई उम्मीदवारों ने यह जिम्मेदारी सीधे रोजंदारी मजदूरों पर डाल दी है। इसी कारण शहर में मजदूरों की भारी कमी महसूस की जा रही है।
चुनाव प्रचार अंतिम चरण में होने से अनेक निर्दलीय तथा राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों ने अगले 3 दिनों के लिए मजदूरों की एडवांस बुकिंग कर ली है। प्रचार के लिए मजदूर न मिलने से कई उम्मीदवारों ने सीधे भवन निर्माण मजदूर तथा मजदूर आपूर्ति करने वाले ठेकेदारों से हाथ मिलाया है। इधर विभिन्न राजनीतिक दलों की सभाएं एक ही दिन में आयोजित होने से मजदूरों की मांग और तेज हो गई है।
मजदूरों की भारी डिमांड
कई उम्मीदवारों ने अपनी सभाओं में भीड़ दिखाने के लिए बड़ी संख्या में मजदूरों को बुलाने की व्यवस्था की है। चुनावी मौसम में मजदूरों के हाथ काम जरूर लगा है, लेकिन इसका सीधा असर अन्य कामों पर पड़ा है। भवन निर्माण तथा कृषि संबंधित कार्य धीमे पड़ गए हैं। विशेष रूप से महिला मजदूरों की भारी मांग देखने को मिल रही है।
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महिलाओं को प्रतिदिन 300 से 500 रुपये तक की मजदूरी मिल रही है। कई महिलाएं सुबह एक पार्टी की रैली में शामिल होकर सामग्री थैली में डाल लेती हैं और तुरंत दूसरे उम्मीदवार का प्रचार करने निकल पड़ती हैं। चुनावी माहौल से मजदूरों में “अच्छे दिन” नजर आ रहे है।
निर्दलीय प्रत्याशी को चुनावी चिन्ह देरी से मिलने के कारण उनका प्रचार और भी कठिन हो गया है, जिससे वे मजदूरों पर ज्यादा निर्भर हो रहे हैं। कार्यकर्ताओं की कमी के चलते कई प्रत्याशी मजदूरों से ही घर-घर प्रचार, रैली तथा सभाओं में भीड़ जुटाने का काम करवा रहे हैं।
गुटबाजी का चुनाव-प्रचार पर असर
नप चुनाव में प्रत्याशियों के चयन को लेकर प्रमुख राजनीतिक दलों के पदाधिकारी तथा नेताओं के बीच गुटबाजी साफ तौर पर देखने को मिली। यह उम्मीद की जा रही थी कि प्रचार शुरू होते ही यह गुटबाजी खत्म हो जाएगी, लेकिन प्रचार के अंतिम तीन दिन शेष रहते भी दल के नेता अपने उम्मीदवारों के प्रचार के लिए एकजुट दिखाई नहीं दे रहे हैं। ऐसे में इस गुटबाजी का सीधा नुकसान उम्मीदवारों को होने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
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कांग्रेस, भाजपा, राष्ट्रवादी कांग्रेस तथा दोनों शिवसेना गुटों के कुछ नाराज पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं ने पार्टी छोड़कर अन्य दलों में प्रवेश किया है। इसी कारण नगर परिषद चुनाव में आंतरिक कलह तथा मनमुटाव का सामना प्रत्याशियों को करना पड़ रहा है। चुनाव प्रचार अंतिम चरण में पहुंच चुका है, फिर भी नेताओं के बीच आपसी मेल-मिलाप न होने की स्थिति स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।
चुनावी मौसम में डिमांड हाई, अन्य कार्य प्रभावित
- चुनावी प्रचार में मजदूरों की भारी मांग से निर्माण और कृषि कार्य ठप।
- उम्मीदवारों की ओर से एडवांस बुकिंग बढ़ने से बाजार में मजदूरों की उपलब्धता कम।
- महिला मजदूरों की विशेष मांग, रोजी 300–500 रुपये तक।
- एक ही दिन में कई रैलियां होने से मजदूरों का दोहरे-तिहरे प्रचार में इस्तेमाल।
- भीड़ जुटाने के लिए कई उम्मीदवार मजदूरों पर पूरी तरह निर्भर।
नवभारत लाइव के लिए सुरेश नगराले की रिपोर्ट
