जिला पुलिस अधीक्षक नीलोत्पल (सौजन्य-नवभारत)
Red Line deadline March 31: गड़चिरोली जिला पुलिस अधीक्षक नीलोत्पल ने बताया कि पुलिस द्वारा नक्सलियों पर पूरी तरह से नकेल कसी हुई है। नक्सलियों के रेडलाइन की डेड लाइन का समय पास आ गया है। बावजूद इसके बचे हुए नक्सलियों को ढूंढ-ढूंढ कर मारेंगे, केवल 3 दिन का समय शेष है।
जिसके मद्देनजर जिले में कहीं भी नक्सलियों की हलचलें नजर नहीं आ रही है। रिकॉर्ड के अनुसार जिले में 6 नक्सली बचे हुए हैं। लेकिन इन 6 नक्सलियों की भी जिले में सक्रियता नहीं दिखाई दे रही है। इनमें के 4 नक्सली जिले के बाहर अबुझमाड़ के घने जंगलों में छिपे होने का अनुमान है।
मुठभेड़ में अनेक नक्सली मारे गए तथा सरकार की प्रभावी आत्मसमर्पण योजना के चलते अनेक नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष हथियार डालकर विकास की मुख्य धारा में लौटे है। जिले में 1980 के दशक में प्रवेश करने वाले नक्सलियों का कुछ वर्षों में हिंसाचार काफी बढ़ गया था। जिसके चलते गढ़चिरोली जिला नक्सलियों की गतिविधियों के लिए जाना जाता था।
नक्सलियों के भय के तले दुर्गम क्षेत्र के नागरिक विचरण करते थे। लेकिन बीते कुछ वर्षों से जिला पुलिस दल द्वारा चलाए जा रहे निरंतर नक्सल विरोधी अभियान के चलते जिला नक्सल मुक्ति की ओर बढ़ रहा है। केंद्र सरकार ने भी नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को 31 मार्च तक नक्सलमुक्त करने की घोषणा की थी। इसके मद्देनजर जिले में भी पुलिस द्वारा निरंतर कार्रवाई जारी है।
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भामरागड़ के कुछ क्षेत्रों में नक्सलियों की गतिविधियां होने के मद्देनजर परिसर में नक्सली विरोधी अभियान तीव्र रूप से चलाया जा रहा है। फिलहाल जिले में नक्सलियों पर नकेल कसी गई है, जिससे स्थिति पूरी तरह से नियंत्रित है। नक्सली आत्मसमर्पण कर विकास की मुख्य धारा में आए ऐसा आह्वान भी किया। नक्सल प्रभावित गड़चिरोली जिला पुलिस के निरंतर कार्रवाई व आत्मसमर्पण योजना के मद्देनजर नक्सल मुक्ति की ओर बढ़ रहा है।