गड़चिरोली नक्सलमुक्त (सौजन्य-नवभारत)
Amit Shah Naxal Deadline: गड़चिरोली जिले में बिते कुछ वर्षो से नक्सलियों पर पुलिस निरंतर हावी रही है। ऐसे में मुठभेडों में नक्सलियों को मार गिराने के साथ ही नक्सलियों को दबोचने में भी पुलिस सफल रही है। वहीं सरकार की आत्मसमर्पण योजना के चलते अनेक नक्सलियों ने पुलिस के शरण में आए। इस बिच केंद्र सरकार ने 31 मार्च की डेडलाइन घोषित करते हुए नक्सलियों का का सफाया करने का ऐलान किया गया था।
जिसके तहत पुलिस ने भी नक्सल विरोधी अभियान को तीव्र किया। इसके चलते जिले में महजन 6 नक्सली बचे हैं। लेकिन उक्त नक्सलियों की भी जिले में कोई हलचल नहीं होने के चलते वे कहीं भूमिगत होने की संभावना व्यक्त हो रही है। इसके चलते 31 मार्च की डेडलाइन समाप्त होने में महज 2 दिनों का समय शेष है। ऐसे में 1 अप्रैल से क्या गड़चिरोली जिला नक्सलमुक्त होगा, क्या विगत 4 दशक से जिले पर छाया लाल दहशत का साया हटेगा यह सवाल पुछा जाने लगा है।
वनसंपन्न, आदिवासी बहुल गड़चिरोली जिले में करीब 4 दशक पूर्व जिले के दक्षिण छोर से नक्सलियों का प्रवेश हुआ। शुरूआती दिनों में नक्सलियों ने यहां आदिवासियों के अज्ञानता का लाभ उठाकर बहलाना शुरू किया। फिर, धीरे-धीरे अपने लाल आतंक को फैलाना शुरू किया। इस दौरान नक्सलियों ने सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के साथ ही मुखबिरी के आरोप में अनेक बेगुनाह नागरिकों की जाने ली।
वहीं सरकारी संपत्ति का नुकसान किया। जिले में बढ़ते नक्सल प्रभाव के मद्देनजर केंद्रीय आरक्षित पुलिस बल व राज्य आरक्षित पुलिस बल को भी जिले में तैनात किया। जिसके बाद बिते कुछ वर्षो से जिले में पुलिस निरंतर नक्सलियों पर हावी रही। नक्सलियों के साथ हुए मुठभेड में अपनी समझभरी रणनिति के तहत नक्सलियों को ढेर करने में कामयाब रही।
इस दौरान पुलिस दल ने वर्ष 2021 से अबतक कुल 99 नक्सलियों को यमलोक पहुंचाया। इसके साथ ही गुप्तचरों को सक्रिय करते हुए नक्सलियों के ठिकानों का पता लगाकर करीब 140 नक्सलियों को दबोचा। इससे नक्सलियों की कमर टूट गई। राह भटके नक्सलियों को सन्मानपूर्वक जीवनयापन के लिए पुलिस ने आत्मसमर्पन योजना शुरू की।
इसके मद्देनजर 794 नक्सली पुलिस के शरण में आए है। इसमें वर्ष 2025 से यानी करीब एक से डेढ़ वर्षो में ही 123 नक्सलियों ने आत्मसमर्पन कर खुशहाली का मार्ग अपनाया। इसमें 11 बड़े कैडर के नक्सली भी शामिल है। इसके मद्देनजर नक्सल आंदोलन अपने समाप्ती के कगार पर पहुंच गया। इस बीच बिते दिनों केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 31 मार्च के पूर्व नक्सलियों का सफाया करने का ऐलान किया।
वहीं सुरक्षा बलों को इस संदर्भ में निर्देश दिए। जिसके चलते गड़चिरोली जिला पुलिस व कार्यरत केंद्रीय आरक्षित पुलिस बल व राज्य आरक्षित पुलिस बल ने तीव्र नक्सल विरोधी अभियान शुरू किया है। इस बीच 19 मार्च 30 नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पन किया था।
जिसके चलते पुलिस रिकार्ड के अनुसार अब जिले में महज 6 नक्सली बचे हुए है। जिले में कहीं भी नक्सलियों की हलचल नहीं है। ऐसे में यह नक्सली भूमिगत होने की संभावना व्यक्त हो रही है। ऐसे में लगबग गड़चिरोली जिला नक्सलमुक्त होने के आसार है। ऐसे में 1 अप्रैल से क्या गड़चिरोली जिला नक्सलमुक्त होगा, ऐसा सवाल पुछा जा रहा है।
जिले में विगत 4 दशकों ने नक्सलियों के लाल आतंक का साया रहा है, इसके मद्देनजर जिले के दुर्गम क्षेत्रों में आदिवासी नागरिक दहशत में जीवनयापन करते आए हैं। दुर्गम क्षेत्र में अक्सर मुठभेड़ होने के गोलीबारी की गूंज अनेकों ने सूनी है।
नक्सलियों द्वारा मुखबिरी में लोगों की पिटाई तथा उनकी हत्या करने के चलते दुर्गम क्षेत्रों लोगों के मनों में नक्सलियों का भय है। अक्सर नक्सलियों के शहीद सप्ताह के दौरान दुर्गम क्षेत्र के नागरिक दहशत के चलते बाजार बंद रखते है, वहीं खेती के कार्य भी बंद रखते है।
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विगत कुछ वर्षो में पुलिस की प्रभावी रणनीति के चलते नक्सल आंदोलन समाप्ती की कगार पर पहुंच गया है। अब जिले में केवल 6 नक्सली बचे होने का दांवा पुलिस कर रही है। वहीं 31 मार्च की डेडलाईन समाप्त होने में महज 2 दिन शेष है। ऐसे में जिला नक्सलमुक्त होगा यह सवाल तो उठ ही रहा है, लेकिन क्या दुर्गम क्षेत्र के लोगों के मन में बैठा नक्सलियों का भय दूर होगा, यह भी सवाल निर्माण हो रहा है।