चंद्रपुर के वरोरा में जलसंकट, किसानों की खेत तालाब और फेंसिंग पर अनुदान की मांग तेज
Water Conservation: वरोरा में जलसंकट से निजात के लिए किसानों ने खेत तालाब निर्माण, फेंसिंग पर अनुदान और खुदाई की मिट्टी के उपयोग की अनुमति को स्थायी समाधान के रूप में लागू करने की मांग की है।
- Written By: अनन्या तिवारी
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स-AI)
Groundwater Depletion In Chandrapur Warora Region: चंद्रपुर के वरोरा में हाल के ग्रीष्मकाल के दिनों में आम नागरिकों को भारी जलसंकट का सामना करना पड़ा है। वैसे यह पहला मौका नहीं है। यह स्थिति प्रतिवर्ष आती है और अनेक स्थानों पर धरना, आंदोलन और प्रदर्शन होते हैं।
अधिकारी महज आश्वासन देकर मामले को निपटा देते हैं और फिर बरसात शुरू हो जाती है, जिससे सभी इस समस्या को भूल जाते हैं। इसलिए किसानों ने जलसंकट से निपटने के लिए स्थायी विकल्प के रूप में खेत तालाब और उसकी सुरक्षा के लिए फेंसिंग पर अनुदान देने की मांग प्रशासन से की है।
तालाब निर्माण से बढ़ेगा भूजल स्तर
पुराने समय में हर शहर और गांव में अनेक तालाब हुआ करते थे। तालाबों की वजह से शहर और गांव के भूगर्भ का जलस्तर कायम रखने में सहायता मिलती थी, लेकिन बदलते परिवेश और आधुनिकीकरण के कारण शहरों से तालाब विलुप्त होते गए। वरोरा की बात करें तो यहां अब केवल गांधी तालाब ही बचा है।
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राज्य के अनेक हिस्सों में यही स्थिति देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री ने भी अगले साल पानी की किल्लत का सामना न करना पड़े, इसके लिए प्रशासन को जलाशयों पर विशेष काम करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश से प्रेरित होकर किसानों ने मांग की है कि यदि कोई किसान अपने खेत में कृषि तालाब अथवा मछली पालन का तालाब बनाना चाहता है तो उसे अनुमति दी जाए।
किसान यदि अपनी जमीन पर तालाब बनाता है तो इससे आसपास के भूगर्भ का जलस्तर बढ़ेगा और उसे सिंचाई की सुविधा मिलेगी। आवश्यकता पड़ने पर वह दूसरे किसानों को भी सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध करा सकता है। किसानों का कहना है कि तालाब गहरीकरण से निकलने वाली अत्यंत उपजाऊ मिट्टी, मुरूम को बिना रॉयल्टी किसानों और उद्यमियों को बेचने की अनुमति दी जाए। साथ ही तालाब खुदाई अथवा गहरीकरण के लिए शासन की ओर से आर्थिक मदद भी दी जानी चाहिए। इससे भूजल स्तर बढ़ेगा, पानी का संचय होगा और किसान भी आर्थिक रूप से मजबूत होगा।
फेंसिंग पर भी मिले अनुदान, किसानों ने रखी मांग
विशेष रूप से ग्रीष्मकाल के दिनों में पानी की तलाश में आने वाले जंगली जानवर तालाबों में गिरकर मर जाते हैं। इसलिए तालाब और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए तालाब के चारों ओर कंटीली तार की फेंसिंग लगाने पर भी अनुदान दिया जाना चाहिए। किसानों का कहना है कि इससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और बरसात के पानी का बेहतर संचय भी हो सकेगा।
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किसानों की प्रतिक्रियाएं
दुष्यंत ताजने, किसान (खांबाडा) के अनुसार, हाल ही में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा अगले वर्ष पानी की किल्लत से बचने के लिए जलसंचय के निर्देश दिए गए हैं। यदि प्रशासन किसानों को खेत में मछली तालाब निर्माण और फेंसिंग के लिए अनुदान प्रदान करे तथा खुदाई से निकलने वाली मिट्टी, मुरूम और पत्थर को बिना रॉयल्टी बेचने की अनुमति दे, तो इससे किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। साथ ही खेतों के लिए सिंचाई हेतु पानी उपलब्ध होगा और भूगर्भ जलस्तर भी बढ़ेगा। इससे शासन का उद्देश्य भी पूरा होगा और आम लोगों को पर्याप्त पानी मिल सकेगा।
त्रिशूल घाटे, किसान (वरोरा) के अनुसार, हर शहर और गांव में किसानों को मछली तालाब या खेत सिंचाई के लिए छोटे तालाब निर्माण तथा उनकी सुरक्षा हेतु फेंसिंग पर अनुदान मिलना चाहिए। इसके साथ ही खुदाई से निकलने वाले खनिजों को बेचने की अनुमति राजस्व विभाग द्वारा दी जानी चाहिए। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और सरकार के जलसंचय अभियान को भी गति मिलेगी।
परमेश्वर भटकर, किसान (मकसूर कोसरसार) का कहना है कि मुख्यमंत्री ने प्रशासन को अगले वर्ष पानी की किल्लत से बचने के लिए जलसंचय पर ध्यान देने के निर्देश दिए हैं, जिसमें किसानों की भूमिका अहम है। इच्छुक किसानों को खेत तालाब खुदाई के लिए अनुदान और मिट्टी के बिना रॉयल्टी परिवहन की अनुमति दी जानी चाहिए। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और अधिक किसान इस योजना से जुड़ेंगे। गांव-गांव छोटे तालाब बनने से पानी की समस्या में राहत मिलेगी तथा जरूरत पड़ने पर किसान अपने तालाब का पानी गांव और शहरों के लिए उपलब्ध कराने को भी तैयार रहेंगे।
