Gadchiroli News: निर्माण के तीन साल में ध्वस्त हुआ कोठी-कोरणार पुल, सीएम कार्यालय ने मांगी रिपोर्ट
PWD Gadchiroli: गडचिरोली के एटापल्ली तहसील में तीन साल पहले बना कोठी-कोरणार पुल बाढ़ के तेज बहाव में क्षतिग्रस्त हो गया। निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद सीएम कार्यालय ने रिपोर्ट तलब की है।
- Written By: आंचल लोखंडे
कोठी-कोरणार पुल (सोर्सः सोशल मीडिया)
Gadchiroli Bridge Collapse: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा उद्घाटित एटापल्ली तहसील के कोठी-कोरणार पुल के मात्र तीन वर्ष के भीतर ध्वस्त हो जाने से गडचिरोली जिले में हाल के वर्षों में हुए सड़क और पुल निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। करोड़ों रुपये की लागत से बना यह पुल बाढ़ के तेज बहाव में क्षतिग्रस्त होने के बाद सार्वजनिक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली, गुणवत्ता नियंत्रण और ठेका प्रक्रिया को लेकर व्यापक आलोचना शुरू हो गई है।
इस घटना से राज्य की राजनीति भी गरमा गई है। विपक्षी दलों ने इसे विकास कार्यों में भ्रष्टाचार, घटिया निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही का प्रतीक बताते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से चर्चा में है और सरकार तथा सार्वजनिक निर्माण विभाग को कठघरे में खड़ा किया जा रहा है।
डिजाइन बदले जाने की जानकारी से बढ़े सवाल
इस मामले में एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, पुल का मूल डिजाइन निर्माण कार्य शुरू होने से पहले बदल दिया गया था। अब यह प्रश्न उठ रहा है कि, डिजाइन में बदलाव किसके निर्देश पर किया गया, क्या उसे विधिवत तकनीकी मंजूरी मिली थी, और क्या बदलाव के बाद स्वतंत्र गुणवत्ता परीक्षण कराया गया था।
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सीएम आफिस ने मांगी स्थानीय प्रशासन से रिपोर्ट
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तत्काल तलब की है। संबंधित अधिकारियों, अभियंताओं और ठेकेदारों की जिम्मेदारी तय करने तथा घटिया निर्माण कार्यों के संबंध में कठोर निर्णय लेने की तैयारी किए जाने की भी चर्चा है। यदि ऐसा होता है, तो केवल कोठी-कोरणार पुल ही नहीं, बल्कि गडचिरोली जिले में लोकनिर्माण विभाग द्वारा कराए गए अन्य विकास कार्यों की भी व्यापक समीक्षा हो सकती है।
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लोनिवि का स्पष्टीकरण
अधीक्षक अभियंता नीता ठाकरे ने कहा कि लोकनिर्माण विभाग की अधीक्षक अभियंता नीता ठाकरे ने कहा कि, अत्यधिक वर्षा, नदी किनारे का कटाव, बाढ़ के पानी में फंसे बड़े लकड़ी के लट्टे तथा नींव पर बढ़े दबाव के कारण पुल क्षतिग्रस्त हुआ। हालांकि इस स्पष्टीकरण से विपक्ष और स्थानीय नागरिक संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि, करोड़ों रुपये खर्च कर बनाया गया पुल यदि पहली बड़ी बाढ़ में ही ध्वस्त हो जाए, तो केवल अत्तिवृष्टि को जिम्मेदार ठहराना घटिया निर्माण पर पर्दा डालने का प्रयास है।
