गड़चिरोली में ‘डिजिटल इंडिया’ फेल! करोड़ों के BSNL टावर खड़े, पर नेटवर्क का नामोनिशान नहीं
BSNL Network Issue Gadchiroli: गड़चिरोली में BSNL सेवा ध्वस्त! पोटेगांव और पैड़ी के ग्रामीण संचार सुविधा को तरसे। करोड़ों के टावर बेकार, ग्रामसभाओं ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी।
- Written By: प्रिया जैस
BSNL के खिलाफ आंदोलन (AI Generated Image)
Potegaon BSNL Tower Problem: गड़चिरोली जिले के पोटेगांव क्षेत्र सहित पैड़ी, जडेगांव तथा मारदा जैसे ग्रामीण व दुर्गम इलाकों में बीएसएनएल की मोबाइल सेवा बुरी तरह चरमरा गई है। करोड़ों रुपये खर्च कर खड़े किए गए मोबाइल टावर अब ग्रामीणों के लिए बेकार साबित हो रहे हैं। टावर मौजूद होने के बावजूद नेटवर्क और इंटरनेट सेवा उपलब्ध नहीं होने से गांवों में भारी नाराजगी फैल गई है।
ग्रामसभाओं ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन तेज किया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि जिन क्षेत्रों में निजी मोबाइल कंपनियों का नेटवर्क किसी हद तक काम कर रहा है, वहीं बीएसएनएल के टावर होने के बावजूद सेवा पूरी तरह ठप पड़ी है। लोगों ने बेहतर संचार सुविधा की उम्मीद में बीएसएनएल की सिम खरीदी, नियमित रिचार्ज भी कराएं, लेकिन अब उन्हें इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा।
गांव से थोड़ी दूरी पर जाते ही नेटवर्क पूरी तरह गायब हो जाता है। इससे उपभोक्ताओं का पैसा भी बर्बाद हो रहा है और जरूरी समय में संपर्क करना भी असंभव बन गया है। इसका असर आपातकालीन परिस्थितियों में सामने आ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति की तबीयत अचानक बिगड़ जाए, कोई दुर्घटना हो जाए, किसी की मृत्यु हो जाए या अन्य कोई आकस्मिक घटना घटे, तो समय पर सूचना देना मुश्किल हो जाता है।
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कई बार मरीज को अस्पताल ले जाने से पहले ही परिवार के लोगों या संबंधित अधिकारियों तक खबर नहीं पहुंच पाती। इससे गांवों का बाहरी दुनिया से संपर्क लगभग टूट जाने जैसी स्थिति बन गई है और लोगों में असुरक्षा की भावना लगातार बढ़ रही है। इस मुद्दे पर पैड़ी ग्रामसभा में पहले ही एक औपचारिक प्रस्ताव पारित किया जा चुका है।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह प्रस्ताव प्रशासन तक पहुंचाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे लोगों में यह धारणा मजबूत हुई है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। स्थानीय आदिवासी समुदाय और ग्रामीण नागरिकों ने इस स्थिति को सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच का बड़ा विरोधाभास बताया है।
निजी टावरों को अनुमति दें
पिछले कई दिनों से बीएसएनएल की सेवा केवल दिखावे की वस्तु बनकर रह गई है। विभाग ने गांव-गांव में टावर तो लगाए, लेकिन उपभोक्ताओं को लगातार नेटवर्क की समस्या झेलनी पड़ रही है। इंटरनेट से होने वाले काम, रिश्तेदारों से संपर्क और सरकारी सेवाएं सब प्रभावित हो रही हैं। प्रशासन को निजी टावरों की अनुमति देकर नागरिकों को मोबाइल कनेक्टिविटी और इंटरनेट सुविधा उपलब्ध करानी चाहिए।
- शिवाजी नरोटे, ग्रामसभा सदस्य, देवापुर
नागरिकों के साथ हो रहा अन्याय
- ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ग्रामीण विकास, डिजिटल संपर्क, ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार और दुर्गम क्षेत्रों तक संचार सुविधा पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन वास्तविक स्थिति बेहद निराशाजनक है।
- करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि सेवा उपलब्ध नहीं हो रही, तो यह न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग है, बल्कि ग्रामीणों के साथ अन्याय भी है।
- ग्रामसभाओं ने स्पष्ट कहा है कि बीएसएनएल सेवा को तत्काल बहाल किया जाए। यदि विभाग ऐसा करने में सक्षम नहीं है, तो वैकल्पिक रूप से निजी कंपनी की मोबाइल सेवा उपलब्ध कराई जाए।
- ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी जारी रही, तो वे उग्र आंदोलन छेड़ने को मजबूर होंगे।
