भूमि अधिग्रहण के विरोध में गडचिरोली के छात्र स्कूल लौटे, आंदोलन फिर शुरू करने की चेतावनी
Gadchiroli Land Acquisition:गडचिरोली में प्रस्तावित एयरपोर्ट परियोजना के लिए कृषि भूमि अधिग्रहण के विरोध में चल रहा छात्रों का स्कूल बहिष्कार आंदोलन फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।
- Written By: आंचल लोखंडे
गडचिरोली भूमि अधिग्रहण- फाइल फोटो- (सोर्सः सोशल मीडिया)
Gadchiroli Airport Project: प्रस्तावित हवाई अड्डे के लिए कृषि भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे हिरापुर, गुरवला और राखी गांवों के छात्रों ने दो सप्ताह से जारी स्कूल बहिष्कार आंदोलन फिलहाल स्थगित कर दिया है। नए शैक्षणिक सत्र के पहले दिन 30 जून से शुरू हुआ यह आंदोलन छात्रों के शैक्षणिक नुकसान को देखते हुए समाप्त किया गया है। मंगलवार से सभी छात्र नियमित रूप से स्कूल जा रहे हैं।
इससे पहले सोमवार को हिरापुर के उपसरपंच दिवाकर निसार, गुरवला के प्रतिनिधि कोठारे, हरीश जंगठे तथा अन्य ग्रामीणों के साथ छात्र गड़चिरोली पहुंचे और जिलाधीश अविश्यांत पंडा से मुलाकात की। सीमित संख्या में छात्रों को कलेक्टर कार्यालय में प्रवेश दिया गया, जहां उन्होंने प्रस्तावित एयरपोर्ट के लिए कृषि भूमि अधिग्रहण संबंधी शासनादेश (जीआर) रद्द करने की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा।
जीआर रद्द करने की मांग बरकरार
जिसके बाद छात्र मंगलवार से स्कूल पहुंचे। जिलाधिश ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि, अगले दो महीनों तक एयरपोर्ट परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
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महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कंपनी द्वारा वनभूमि से संबंधित प्रक्रिया के लिए एजेंसी नियुक्त करने की जारी निविदा का कृषि भूमि अधिग्रहण से कोई संबंध नहीं है। शासनादेश तत्काल ग्रामीणों का कहना है कि, पहले वनभूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। और आगे चलकर कृषि भूमि भी अधिग्रहित की जा सकती है। इसलिए वह परियोजना के लिए कृषि भूमि अधिग्रहण संबंधी शासनादेश को पूरी तरह रद्द करने की मांग पर कायम हैं।
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ग्रामीणों में नाराजी
इस मुद्दे पर जिला प्रशासन की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलने से ग्रामीणों में नाराजगी बनी हुई है। गांव के प्रतिनिधियों ने कहा कि, छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए फिलहाल आंदोलन स्थगित कर उन्हें स्कूल भेजा जा रहा है। यदि एक महीने के भीतर शासनादेश रद्द नहीं किया गया तो दोबारा स्कूल बहिष्कार आंदोलन शुरू किया जाएगा। साथ ही सभी राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधियों से परियोजना प्रभावित किसानों और ग्रामीणों के समर्थन में आगे आने की अपील
भी की गई।
