Doctor Negligence Allegation (सोर्सः सोशल मीडिया)
Gadchiroli Hospital Death Case: गड़चिरोली शहर स्थित जिला महिला एवं बाल अस्पताल में 11 माह की एक बालिका की मौत का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया और कुछ समय के लिए तनावपूर्ण माहौल बन गया।
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह ही जिला सामान्य अस्पताल में पोटेगांव स्थित शासकीय आश्रम स्कूल की एक छात्रा की कथित डॉक्टरों की लापरवाही के कारण मौत होने का आरोप लगाया गया था। अब जिला महिला एवं बाल अस्पताल में भी मृत बालिका के परिजनों ने डॉक्टरों की लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गड़चिरोली तहसील के दिभना गांव निवासी लेंगुरे परिवार की 11 माह की बालिका वंशिका को मामूली उपचार के लिए मंगलवार दोपहर करीब 12:30 बजे गड़चिरोली के जिला महिला एवं बाल अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
भर्ती के बाद डॉक्टरों ने उसका प्राथमिक उपचार शुरू किया। लेकिन बुधवार दोपहर लगभग 3 बजे अचानक बालिका की मौत होने की जानकारी सामने आई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, डॉक्टरों ने आशंका जताई है कि निमोनिया के कारण सांस रुकने से बालिका की मौत हुई होगी।
हालांकि मृत बालिका के परिजनों ने डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अस्पताल में भर्ती कराने के बाद डॉक्टरों ने यह जानकारी नहीं दी कि बालिका के शरीर में खून की कमी है या उसे निमोनिया है। परिजनों के अनुसार उन्होंने कई बार डॉक्टरों से पूछताछ की, लेकिन उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि “बालिका की स्थिति ठीक है, घबराने की कोई बात नहीं है।”
घटना की जानकारी मिलते ही गड़चिरोली शहर के कुछ राजनीतिक पदाधिकारी और नागरिक अस्पताल पहुंच गए। इस मामले में लापरवाही के आरोपी डॉ. स्वप्निल शेडमाके घटना के बाद से संपर्क में नहीं हैं और अस्पताल प्रशासन को भी उनका पता नहीं चल पा रहा है।
इस संबंध में जिला महिला एवं बाल अस्पताल की अधीक्षक डॉ. माधुरी किलनाके ने बताया कि बालिका वंशिका को मंगलवार दोपहर करीब 12:30 बजे अस्पताल में भर्ती किया गया था। उस समय उसके शरीर में ऑक्सीजन की कमी या निमोनिया के गंभीर लक्षण नहीं पाए गए थे। उन्होंने कहा कि अचानक निमोनिया के कारण गले में कफ जमा हो जाने से सांस रुकने की संभावना है, जिससे उसकी मौत हुई होगी। मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
महिला एवं बाल अस्पताल की क्षमता 100 मरीजों की है, लेकिन यहां अक्सर 200 से 300 मरीज भर्ती रहते हैं। इससे डॉक्टरों और कर्मचारियों पर काम का काफी दबाव बना रहता है। मामले को लेकर कांग्रेस के कुछ पदाधिकारियों ने भी अस्पताल प्रशासन की आलोचना की है। उनका आरोप है कि कुछ डॉक्टर समय पर अस्पताल में उपलब्ध नहीं रहते और निजी प्रैक्टिस पर अधिक ध्यान देते हैं।
घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने डॉ. स्वप्निल शेडमाके के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें सेवा से बर्खास्त करने की मांग की है। बढ़ते तनाव को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को बुलाया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर परिजनों से बातचीत की और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस प्रशासन ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।