पवनी गेट पर एक से एक धुरंधर बाघों के दर्शन, टाइगर हॉटस्पॉट, बढ़ी पर्यटकों की भीड़
पवनी गेट, उमरेडपवनीकरंडला वन्यजीव अभयारण्य में बाघों के दर्शन का अद्भुत अनुभव। यहां पर्यटकों की भीड़ बढ़ रही है, जहां जलस्रोतों की उपलब्धता और जैव विविधता का समृद्ध अनुभव मिलता है।
Bhandara News: उमरेडपवनीकरंडला वन्यजीव अभयारण्य का पवनी गेट इन दिनों गारंटीड टाइगर सायटिंग के रूप में तेजी से पहचान बना रहा है. यहां बाघ दिखने की अधिक संभावना के कारण यह गेट पर्यटकों की पहली पसंद बन गया है. सफारी बुकिंग से लेकर स्थल पर पहुंचने तक हर स्तर पर पवनी गेट को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे अन्य प्रवेश द्वारों की तुलना में यहां पर्यटकों की संख्या में स्पष्ट वृद्धि दर्ज की जा रही है.
जलस्रोतों की उपलब्धता एन4, शैडो हैं यहाँ के धुरंधर इस सीजन एन4, पीटी1 जैसे प्रभावशाली बाघ और बाघिन टी20 शैडो जैसे धुरंधर बाघों ने पवनी के पर्यटकों को लगातार दर्शन दिए हैं. इस बढ़ते आकर्षण के पीछे प्रमुख कारण बाघों की लगातार मौजूदगी है.
पवनी क्षेत्र में जलस्रोतों की उपलब्धता और मजबूत शिकार श्रृंखला के चलते इन वन्यजीवों की सक्रियता अधिक बनी रहती है. विशेषकर सुबह के ठंडे समय और शाम के शांत वातावरण में पर्यटकों को नजदीक से बाघ दर्शन का रोमांचक अनुभव प्राप्त हो रहा है.
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कई पर्यटकों ने पहली ही सफारी में बाघ देखने का अनुभव साझा किया है, जिससे इस गेट की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है. पवनी गेट केवल बाघ दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समृद्ध जैव विविधता के लिए भी प्रसिद्ध हो रहा है.
यहां सफारी के दौरान चीतल, सांभर, नीलगाय, जंगली कुत्ते, तेंदुआ और भालू जैसे वन्यजीवों के साथसाथ मोर, ईगल, सेर्पेन्ट ईगल, किंगफिशर, बगुले और विभिन्न जलपक्षियों का भी दर्शन होता है. इससे पर्यटकों को संपूर्ण वन्य जीवन का अनुभव मिलता है.
गेट पर लगने वाली लंबी कतारें इस बढ़ती लोकप्रियता की गवाही दे रही हैं. नागपुर, भंडारा, चंद्रपुर, गडचिरोली सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों के साथसाथ देशभर से पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे फोटो और वीडियो ने भी पवनी गेट को एक हॉट स्पॉट के रूप में स्थापित कर दिया है.
वन विभाग ने बढ़ा दी सतर्कताविशेषज्ञों के अनुसार गर्मी के मौसम में जलस्रोतों के आसपास बाघों की सक्रियता बढ़ जाती है. पवनी क्षेत्र में पानी और शिकार की पर्याप्त उपलब्धता के कारण बाघिनों का स्थायित्व बना हुआ है, जिससे सफारी मार्गों पर उनकी उपस्थिति नियमित रूप से देखी जा रही है.
पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए वन विभाग ने भी सतर्कता बढ़ा दी है. सफारी मार्गों का सुनियोजित प्रबंधन, वाहनों की संख्या पर नियंत्रण और पर्यटकों को नियमों के पालन के निर्देश दिए जा रहे हैं.
वन्यजीवों की प्राकृतिक गतिविधियों में किसी प्रकार का व्यवधान न हो, इसके लिए विशेष ध्यान रखा जा रहा है. आने वाले समय में यह क्षेत्र महाराष्ट्र के प्रमुख वन पर्यटन केंद्र के रूप में और अधिक सशक्त बनने की ओर अग्रसर है.
