भाजपा बैठक में चले लात-घूंसे (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Gadchiroli BJP: गड़चिरोली नगर परिषद के चुनावों के बाद से ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर आंतरिक मतभेद लगातार सामने आ रहे हैं। नगराध्यक्ष पद की उम्मीदवारी से लेकर उपनगराध्यक्ष के चयन तक पार्टी की अंदरूनी खींचतान छिपी नहीं रही। अब बुधवार को होने वाले सभापति पद के चुनाव से पहले भाजपा के भीतर का विवाद सीधे हाथापाई तक पहुंच गया, जिससे राजनीतिक गलियारों में जोरदार चर्चा शुरू हो गई है।
इस घटना ने भाजपा की आंतरिक एकजुटता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और शहर की राजनीति में खलबली मचा दी है। सभापति पद किसे दिया जाए और किस गुट को कितना प्रतिनिधित्व मिले, इस पर सहमति बनाने के उद्देश्य से सोमवार को पूर्व सांसद अशोक नेते के कार्यालय में भाजपा की कोर कमेटी की बैठक आयोजित की गई थी।
बैठक के दौरान जब सभापति पद के नामों पर चर्चा चल रही थी, तभी चुनाव निरीक्षक तथा भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रशांत वाघरे ने यह घोषणा कर दी कि सभापति पद के नाम तय हो चुके हैं। इसी बात को लेकर पार्टी पदाधिकारियों के बीच विवाद शुरू हो गया। कुछ पदाधिकारियों ने यह कहते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी कि उपनगराध्यक्ष के चयन के समय भी उन्हें विश्वास में नहीं लिया गया था।
इसके बाद विधायक डा. मिलिंद नरोटे तथा प्रशांत वाघरे के बीच तीखे शब्दों का आदान-प्रदान शुरू हुआ, जो देखते ही देखते हाथापाई तक जा पहुंचा। इस घटनाक्रम के कारण कोर कमेटी की बैठक चर्चा के बजाय आरोप-प्रत्यारोप और विवादों से घिर गई। सभापति पद के लिए इच्छुक उम्मीदवारों के नाम सामने आते ही गुटबाजी खुलकर उभर आई। नामों पर शुरू हुई बहस कुछ ही देर में तीखे विवाद में बदल गई और बैठक में जमकर खडाजंगी हुई।
परिणामस्वरूप, सभापति पद के नामों पर सहमति बने बिना ही बैठक को बीच में ही समाप्त करना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बैठक के दौरान माहौल इतना गरमा गया कि भाजपा के दो नेता आमने-सामने आ खड़े हुए। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि मामला सीधे हाथापाई तक पहुंच गया।
अचानक हुए इस घटनाक्रम से कुछ भाजपा पदाधिकारी घबरा गए और बैठक छोड़कर बाहर निकल गए। इसी कारण बैठक को अधूरी अवस्था में ही समेटना पड़ा। खास बात यह रही कि कथित तौर पर एक भाजपा नेता द्वारा दूसरे नेता के साथ मारपीट की गई, लेकिन इस संबंध में दोनों पक्षों की ओर से पुलिस में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।
नप में सत्ता भारतीय जनता पार्टी के हाथ में होने के बावजूद, इन आंतरिक मतभेदों से पार्टी की छवि धूमिल हो रही है, ऐसा राजनीतिक जानकारों का कहना है। नगराध्यक्ष तथा उपनगराध्यक्ष के चयन को लेकर उत्पन्न विवाद अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब सभापति पद के चुनाव को लेकर पैदा हुआ यह संघर्ष भाजपा के लिए नई मुसीबत बन गया है।
वहीं, विपक्षी दलों ने भी इस घटना को लेकर भाजपा पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। इस कथित हाथापाई के मामले में भाजपा के आधिकारिक पदाधिकारियों की ओर से अब तक कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, कुछ नेता इसे “मामूली गलतफैमी” बताकर पूरे प्रकरण पर पर्दा डालने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं।
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फिर भी, बुधवार को होने वाले सभापति पद के चुनाव के दौरान स्थिति क्या मोड़ लेती है, इस पर पूरे जिले की निगाहें टिकी हुई हैं। गड़चिरोली नप में सभापति पद का चुनाव न केवल स्थानीय राजनीति, बल्कि जिले में भाजपा की संगठनात्मक अनुशासन की भी बड़ी परीक्षा साबित होता दिखाई दे रहा है।
गड़चिरोली नगर परिषद के सभापति पद को लेकर भाजपा की कोर कमेटी की बैठक में हुए विवाद और खडाजंगी के कारण नाम तय न हो पाने से मामला अब पार्टी के वरिष्ठ स्तर तक पहुंच गया है। इस आंतरिक विवाद की गंभीरता को देखते हुए भाजपा नेता उपेंद्र कोठेकर ने कोर कमेटी के पदाधिकारियों को मंगलवार को नागपुर में तात्कालिक बैठक के लिए बुलाया है।
माना जा रहा है कि इसी बैठक में सभापति पद के नामों पर अंतिम निर्णय लिया गया। इस घटनाक्रम से सभापति पद के लिए जिन नेताओं के नाम चर्चा में थे, उन्हें बड़ा झटका लगा है। अब बुधवार को होने वाले सभापति पद के चुनाव में किसकी नियुक्ति होती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।