‘राज, उद्धव और शिंदे के एकसाथ आने से ही बालासाहेब का सपना होगा पूरा’, आखिर इस नेता ने ऐसा क्यों कहा?
Maharashtra News: शिंदे गुट के नेता गजानन कीर्तिकर ने कहा कि राज, उद्धव का एक होना ये जरूरत महाराष्ट्र और शिवसैनिकों की है। तभी शिवसेना मजबूत होगी।
- Written By: सोनाली चावरे
राज, उद्धव और शिंदे एकसाथ (pic credit; social media)
मुंबई: एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना के नेता गजानन कीर्तिकर ने राज- उद्धव के गठबंधन को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि महाराष्ट्र के असंख्य शिवसैनिकों की यह इच्छा है कि राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे एक साथ आएं। ठाकरे नाम एक ब्रांड है, और वह ब्रांड बना रहना चाहिए। ऐसी इच्छा पुराने शिवसैनिकों की है।
शिवसेना नेता और बालासाहेब के पुराने शिवसैनिक गजानन कीर्तिकर ने कहा, बालासाहेब ठाकरे के जीवित रहते हुए भी राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे को एक करने की कोशिश हुई थी लेकिन शिवसेना का विभाजन हो गया। शिवसेना और मनसे के अलग-अलग होने से शिवसेना को नुकसान हुआ। अब समय है कि ये दोनों एक साथ आएं। ठाकरे नाम एक ब्रांड है, और वह ब्रांड बना रहना चाहिए। ऐसी इच्छा पुराने शिवसैनिकों की है।
शिंदे गुट के नेता गजानन कीर्तिकर ने कहा कि उद्धव ठाकरे ने कहा है कि राज ठाकरे को महायुति छोड़ना चाहिए, तो वहीं राज ने कहा है कि उद्धव को कांग्रेस का साथ छोड़ना चाहिए। दोनों की बातें सही हैं। गजानन कीर्तिकर ने लोकसभा चुनाव के दौरान एकनाथ शिंदे की शिवसेना के लिए प्रचार भी किया था और शिंदे की उपस्थिति में शिवसेना में दोबारा एंट्री ली थी।
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बता दें कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) जो एमवीए के साथ है। एमवीए में कांग्रेस, शिवसेना (UBT) और शरद पवार की पार्टी एनसीपी (SP) है। एकनाथ शिंदे गुट की पार्टी शिवसेना जो महायुति के साथ है। इसमें बीजेपी, शिंदे गुट की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी है।
बीजेपी से कई अड़चनें
कीर्तिकर ने कहा, एकनाथ शिंदे, शिवसेना प्रमुख बालासाहेब की विचारधारा को लेकर ही पार्टी से बाहर निकले थे—जैसे हिंदुत्व, आक्रमक शैली, राष्ट्रीयता और मराठी लोगों का सर्वांगीण विकास लेकिन बीजेपी के साथ होने की वजह से आगे बढ़ने में उन्हें कई अड़चनें आती हैं। दोनों (उद्धव-राज) की शर्तें सही हैं, क्योंकि ये बाधाएं हैं जो अखंड शिवसेना बनने से रोक रही हैं। जब तक ये दूर नहीं होतीं, तब तक मजबूत शिवसेना नहीं बन पाएगी।
एनडीए (NDA) में पहले उद्धव ठाकरे की शिवसेना थी, फिर उन्होंने साथ छोड़ा, और फिर एकनाथ शिंदे ने उसमें प्रवेश किया। दोनों बालासाहेब की विचारधारा को आगे ले जाने की बात करते हैं। लेकिन मतदाता और कार्यकर्ता बालासाहेब की शिवसेना को जानते हैं, न कि बीजेपी या कांग्रेस प्रेरित शिवसेना को। इसलिए अगर असली शिवसेना को फिर से स्थापित करना है, तो इन तीनों को (राज-उद्धव-शिंदे) अपने-अपने गठबंधन छोड़ने होंगे।
राज-उद्धव के एक होने से शिवसेना मजबूत होगी
गजानन कीर्तिकर ने ये भी कहा बालासाहेब खुद चाहते थे कि राज और उद्धव एक हों। उन्हें इस विभाजन के खतरे की पहले से जानकारी थी। आज अगर राज और उद्धव एक होने का रुख ले रहे हैं, तो वह अच्छा संकेत है लेकिन अगर हम फिर से बालासाहेब की प्रचंड, प्रभावशाली शिवसेना देखना चाहते हैं, तो उसमें एकनाथ शिंदे को भी शामिल होना चाहिए। अगर राज, उद्धव और शिंदे तीनों एक साथ आते हैं, तभी एक मजबूत शिवसेना दिखाई देगी। ये जरूरत महाराष्ट्र और शिवसैनिकों की है।
