FDA की रडार पर महाराष्ट्र की कंपनियां, अफ्रीकी देशों में नशे के लिए हो रहा दवाइयों का इस्तेमाल
अफ्रीकी देशों में टपेंटाडोल, कैरीसोप्रोडोल, ओपिओइड आदि दवाइयों का नशे के लिए इस्तेमाल किए जाने का खुलासा हुआ है। जिसके बाद भारत सरकार के निर्देश पर एफडीए ने महाराष्ट्र में इन दवाइयों के उत्पादन पर रोक लगा दी है।
- Written By: आकाश मसने
काॅन्सेप्ट फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया)
मुंबई: महाराष्ट्र की 1000 से ज्यादा दवा उत्पादक कंपनियां इन दिनों फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की नजर में है। नाइजीरिया, घाना आदि अफ्रीकी देशों में टपेंटाडोल, कैरीसोप्रोडोल, ओपिओइड आदि दवाइयों का नशे के लिए इस्तेमाल किए जाने का खुलासा हुआ है। जिसके बाद भारत सरकार के निर्देश पर एफडीए ने महाराष्ट्र में इन दवाइयों के उत्पादन पर रोक लगा दी है तथा इनके निर्यात पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। इतना ही नहीं इन दवाओं की उत्पादक कंपनियां एफडीए की रडार पर भी आ गई हैं।
फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के संयुक्त आयुक्त डीआर गहाने ने बताया कि नाइजीरिया, घाना आदि देशों में ट्रामाडोल, टपेंटाडोल और कैरीसोप्रोडोल जैसी ओपिओइड दवाइयों के दुरुपयोग की बात हाल ही में सामने आयी है।
जांच करने पर पता चला कि एवियों नामक कंपनी इन दवाओं का महाराष्ट्र में उत्पादन करती है तथा दूसरे देशों में निर्यात भी करती है। इसलिए एफडीए ने कंपनी के कारखाने और गोदाम पर छापा मारा और सारा स्टॉक जब्त कर लिया।
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उत्पादन पर रोक, निर्यात पर लगाया गया प्रतिबंध
इसके साथ ही आगे की उत्पादन प्रक्रियाओं को भी रोक दिया गया है तथा निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया। एवियो के अलावा इन दवाइयों का उत्पादन कोई और कंपनी तो नहीं कर रही है? इसकी भी जांच एफडीए कर रहा है। इसके लिए सभी विभागीय अधिकारियों को जांच करने के निर्देश दिए जा चुके है।
एफडीए को मिली थी दुरुपयोग की जानकारी
ऑल फूड एंड ड्रग लाइसेंस होल्डर्स फाउंडेशन के अध्यक्ष अभय पांडे ने बताया कि प्रदेश में उत्पादित इन दवाइयों के विदेशों में हो रहे दुरुपयोग को लेकर संस्था ने पहले ही एफडीए को आगाह किया था। उन्होंने बताया कि वर्तमान में सिल्डेनाफिल टैबलेट का भी दुरुपयोग हो रहा है।
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हालांकि इन दवाइयों को डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन बगैर नहीं देने का निर्देश दिया गया है लेकिन कई मेडिकल स्टोर वाले इसे बिना प्रिस्क्रिप्शन के बेच रहे हैं। यह एक सेक्स उत्तेजक टैबलेट है, जिसका ओवरडोज मरीज की जान तक ले लेता है।
