
धुले में हिंसा के बाद पुलिस तैनात (सोर्स: सोशल मीडिया)
Dhule Municipal Election Violence News: धुले महानगरपालिका चुनाव के दौरान चल रही राजनीतिक खींचतान अब हिंसक मोड़ ले चुकी है। नामांकन वापसी के अंतिम दिन शुक्रवार को शहर के देवपुर इलाके में भाजपा और अजित पवार गुट (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) के समर्थकों के बीच जमकर खूनी संघर्ष हुआ। इस वारदात में न केवल मारपीट हुई, बल्कि सरेआम फायरिंग भी की गई, जिसमें दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इस घटना के बाद से ही पूरे धुले शहर में तनाव का माहौल बना हुआ है।
ये वारदात दोपहर करीब दो बजे की है, जब देवपुर स्थित नेहरू नगर के शनिमंदिर चौक पर दोनों दलों के समर्थक आमने-सामने आ गए। मिली जानकारी के अनुसार, एक ही वार्ड में नामांकन वापसी और प्रचार की रणनीति को लेकर दोनों गुटों के बीच तीखी बहस शुरू हुई। देखते ही देखते बहस धक्का-मुक्की और मारपीट में तब्दील हो गई। इसी बीच, भीड़ में मौजूद एक अज्ञात व्यक्ति ने अचानक फायरिंग कर दी। गोली भाजपा उम्मीदवार के रिश्तेदार उमेश कांबले को लगी, जिससे वे मौके पर ही लहूलुहान होकर गिर पड़े। उन्हें तुरंत उपचार के लिए निजी अस्पताल ले जाया गया है, जहाँ उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई है।
धुले में हिंसा का यह दौर केवल एक घटना तक सीमित नहीं रहा। देवपुर की फायरिंग से ठीक पहले एक अन्य स्थान पर भी हिंसक झड़प की खबर मिली, जिसमें अजित पवार गुट के उम्मीदवार कैलास चौधरी गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने घटनास्थल से कुछ धारदार हथियार भी बरामद किए हैं, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि इस संघर्ष की तैयारी पहले से की गई थी। दरअसल, भाजपा के चार उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने के बाद से ही शहर में दबाव और धमकी के आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी था।
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इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए धुले के पालकमंत्री जयकुमार रावल ने विपक्षी दलों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “नामांकन दलों को अपनी हार साफ नजर आ रही है। सामान्य व्यक्तियों को नामांकन वापस लेने के लिए डराया और धमकाया गया, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के पूरी तरह विरुद्ध है। चुनाव आयोग को इस हिंसा और दबाव की राजनीति का तुरंत संज्ञान लेना चाहिए।”
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक श्रीकांत धिवरे भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। संवेदनशील इलाकों और अस्पतालों के बाहर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया है। फिलहाल पुलिस सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के आधार पर संदिग्धों की पहचान कर रही है। हालांकि, देर शाम तक किसी भी पक्ष ने औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई थी, लेकिन पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। चुनाव के माहौल में हुई इस गोलीबारी ने पुलिस प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।






