‘ठाकरे से नाराजगी या पिता के हत्यारे को सजा दिलाने की कोशिश’, ओमराजे निंबालकर ने खुद बताई बगावत की वजह
Omraje Nimbalkar Reveals Rebellion Reason: उद्धव ठाकरे के कट्टर वफादार रहे सांसद ओमराजे निंबालकर ने बगावत की असली वजह बताई; फंड और नेतृत्व पर उठाए सवाल।
- Written By: अनिल सिंह
ओमराजे निंबालकर ने खुद खोला राज, क्यों छोड़ा उद्धव ठाकरे का साथ? (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
Omraje Nimbalkar Interview: महाराष्ट्र की सियासत में ‘ऑपरेशन टाइगर’ के तहत शिवसेना (यूबीटी) को सबसे बड़ा झटका धराशिव (उस्मानाबाद) से दूसरी बार सांसद बने ओमराजे निंबालकर ने दिया है। साल 2022 के पहले विभाजन के समय मातोश्री के साथ चट्टान की तरह खड़े रहने वाले और अपने आक्रामक भाषणों से उद्धव ठाकरे के सबसे बड़े वफादार सिपाही बने ओमराजे की बगावत ने पूरे राज्य को स्तब्ध कर दिया है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 20 जून 2026 को उनके पिता (पवनराजे निंबालकर) के चर्चित हत्याकांड पर कोर्ट का अंतिम फैसला आने की उम्मीद है, जिसकी जांच सीबीआई ने की थी, और बगावत के पीछे कहीं न कहीं पिता के हत्यारों को सजा दिलाने की कोशिश भी जुड़ी है। हालांकि, इन अटकलों के बीच खुद ओमराजे निंबालकर ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए बगावत की असली और चौंकाने वाली वजहें सामने रख दी हैं।
विकास फंड की कमी से टूट गया सब्र
एक प्रमुख समाचार पत्र (दिव्या मराठी) को दिए साक्षात्कार में ओमराजे निंबालकर ने पार्टी नेतृत्व के प्रति अपना गहरा दर्द बयां किया। बगावत के आर्थिक और जमीनी कारणों को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा, “जनता को सिर्फ भाषण नहीं, अपने क्षेत्र का विकास कार्य चाहिए। मैंने पार्टी नेतृत्व के सामने तीन बार महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे, लेकिन हमारे काम पूरे नहीं हो पा रहे हैं। हमारे पास विकास कार्यों के लिए धन (फंड) ही नहीं है। दूसरी ओर, हमारे विरोधी धड़े के पास सत्ता और असीमित धन है। ऐसे में अगर हम केवल वफादारी के नाम पर जनता का काम ही नहीं कर पाएंगे, तो उनके सामने दोबारा वोट मांगने किस मुंह से जाएंगे? आखिर एक सांसद कब तक खाली हाथ घूमता रहेगा? मेरे पास अब कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था।”
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ठाकरे के काम पर असंतोष, आदित्य ठाकरे की निष्क्रियता पर सवाल
ओमराजे ने न केवल फंड की कमी, बल्कि उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे के काम करने की सुस्त शैली पर भी तीखा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा, “महायुति के नेताओं और हमारे पार्टी नेतृत्व के काम करने के तरीके में जमीन-आसमान का अंतर है। लोकसभा चुनाव में इतनी सीटें जीतने के बाद भी एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस चुप नहीं बैठे हैं। वे स्थानीय निकाय चुनावों से लेकर आगामी विधानसभा चुनावों के लिए दिन-रात एक कर रहे हैं।” ओमराजे ने आगे कहा, “हम समझ सकते हैं कि उद्धव जी स्वास्थ्य कारणों से सक्रिय नहीं हो पा रहे हैं, लेकिन कम से कम युवा नेता आदित्य ठाकरे को तो आगे आकर मैदान संभालना चाहिए था, कार्यकर्ताओं को ताकत देनी चाहिए थी। दुर्भाग्य से, उनकी तरफ से ऐसी कोई सक्रियता नहीं दिखी।”
व्हिप के उल्लंघन के बाद अब वापसी के रास्ते बंद, शिंदे सेना में प्रवेश तय
उद्धव गुट द्वारा बुलाई गई आपातकालीन संसदीय दल की बैठक और जारी किए गए ‘व्हिप’ को पूरी तरह दरकिनार करने के बाद ओमराजे निंबालकर और अन्य 5 सांसदों का रास्ता अब साफ हो चुका है। निंबालकर के इस बेबाक बयान ने यह साफ कर दिया है कि यह बगावत अचानक नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे लंबे समय से सुलग रहा वैचारिक और प्रशासनिक असंतोष था। 20 जून को आने वाले अदालती फैसले और 21 जून के बाद होने वाले आधिकारिक विलय से ठीक पहले, ओमराजे का यह कबूलनामा उद्धव ठाकरे के बचे-खुचे कैडर के मनोबल को तोड़ने के लिए काफी है।
