

Omraje Nimbalkar Rebellion Shinde Sena: महाराष्ट्र की सियासत में 'ऑपरेशन टाइगर' के जरिए शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) से अलग हुए 6 बागी सांसदों की मुश्किलें अभी खत्म भी नहीं हुई थीं कि अब नए राजनीतिक घटनाक्रमों ने हलचल तेज कर दी है। धाराशिव से सांसद ओमराजे निंबालकर, जिन्होंने हाल ही में उद्धव गुट को छोड़ शिंदे खेमे के साथ हाथ मिलाया था, अब खुद 'असुरक्षित' महसूस कर रहे हैं। ताजा खबरों के अनुसार, निंबालकर अब एकनाथ शिंदे की शिवसेना से भी दूरी बनाकर सीधे भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने की संभावनाओं को तलाश रहे हैं।
दिल्ली से पुणे लौटने के दौरान निंबालकर को शिवसैनिकों के जिस भारी विरोध का सामना करना पड़ा, उसने उनके लिए आगे की राह बेहद कठिन बना दी है। निंबालकर को लगा रहा है कि शिंदे सेना के साथ उनका राजनीतिक भविष्य खतरे में पड़ सकता है।
दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात और शिंदे गुट के साथ गुप्त बैठकों के बाद जब ओमराजे निंबालकर पुणे हवाई अड्डे पर उतरे, तो उन्हें अपने ही कार्यकर्ताओं के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। हवाई अड्डे पर मौजूद आक्रोशित शिवसैनिकों ने उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बताया जाता है कि भीड़ के उग्र तेवर को देखते हुए सुरक्षा बलों को मशक्कत करनी पड़ी और निंबालकर को करीब तीन घंटे तक एयरपोर्ट पर ही इंतजार करना पड़ा। अंततः, बिगड़ती स्थिति को भांपते हुए वे चुपके से पिछले दरवाजे से निकल गए। यह घटना बताती है कि ठाकरे गुट छोड़ने का फैसला उनके निर्वाचन क्षेत्र में कितना अलोकप्रिय साबित हो रहा है।
ओमराजे निंबालकर ने पिछले लोकसभा चुनाव में अर्चना पाटिल को 3 लाख 29 हजार से अधिक मतों के भारी अंतर से हराकर राज्य में दूसरी सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी। धराशिव की जनता ने तब अजित पवार गुट के खिलाफ एक स्पष्ट जनादेश दिया था। अब, निंबालकर का शिंदे गुट में जाना क्षेत्र की जनता को रास नहीं आ रहा है। जमीनी फीडबैक के अनुसार, वहां के मतदाता शिंदे गुट के साथ जाने के खिलाफ हैं। जनता के इसी बढ़ते दबाव को देखते हुए निंबालकर अब शिंदे गुट को अपना 'सुरक्षित राजनीतिक भविष्य' नहीं मान रहे हैं।
सूत्रों का दावा है कि ओमराजे निंबालकर ने अब भाजपा को एक 'अल्टरनेटिव पॉलिटिकल रूट' के रूप में देखना शुरू कर दिया है। उन्हें डर है कि यदि वे शिंदे गुट में बने रहते हैं, तो आने वाले विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ सकता है। यदि निंबालकर शिंदे गुट से बगावत कर भाजपा का दामन थामते हैं, तो यह न केवल शिंदे सरकार के लिए एक बड़ा झटका होगा, बल्कि लोकसभा अध्यक्ष के पास पंजीकृत उस 'स्वतंत्र सांसद समूह' के लिए भी कानूनी संकट पैदा कर देगा, जिसके लिए 2/3 सांसदों का साथ होना अनिवार्य है। फिलहाल, महाराष्ट्र की राजनीति में ओमराजे निंबालकर की अगली चाल पूरे राज्य के समीकरणों को फिर से बदलने की क्षमता रखती है।