निदा खान केस में इम्तियाज जलील भी सह-आरोपी, बोले- आरोपपत्र देखने के बाद रखूंगा पक्ष

Imtiyaz Jaleel Nida Khan Case: निदा खान प्रकरण में सह-आरोपी बनाए जाने की जानकारी पर इम्तियाज जलील ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पुलिस पूछताछ, मामले के राजनीतिकरण और मीडिया कवरेज पर सवाल उठाए।
Imtiyaz Jaleel Nida Khan Case Police Investigation And Media Questions
इम्तियाज जलील और निदा खान(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Highlights

  • जलील ने कहा कि आरोपपत्र देखने के बाद ही आरोपों पर विस्तार से जवाब देंगे।

  • नासिक पुलिस ने उन्हें तीन बार पूछताछ के लिए बुलाया और आवाज के नमूने लिए।

  • जलील के मुताबिक, निदा ने धमकी भरे फोन आने की जानकारी दी थी।

  • अशोक खरात प्रकरण और तुलजापुर हत्याकांड का भी उल्लेख किया।

Police Investigation And Media Questions: निदा खान प्रकरण में AIMIM नेता और पूर्व सांसद इम्तियाज जलील को भी सह-आरोपी बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। इस पर जलील ने कहा कि उन्हें अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उनके खिलाफ कौन से आरोप लगाए गए हैं। आरोपपत्र की प्रति देखने के बाद ही वह इस बारे में विस्तार से अपनी बात रखेंगे।

शुक्रवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि नासिक पुलिस ने उन्हें तीन बार पूछताछ के लिए बुलाया था और उनकी आवाज के नमूने भी लिए हैं। हालांकि, उन्होंने पूरे मामले को राजनीतिक रंग देने और AIMIM को निशाना बनाने का आरोप लगाया।

तीन बार पुलिस के सामने हुए पेश

जलील ने बताया कि नासिक पुलिस ने जब भी उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया, वे जांच में सहयोग करने पहुंचे। मुंबई की एक सभा में निदा खान के संबंध में दिए गए भाषण की रिकॉर्डिंग भी उन्हें सुनाई गई और आवाज का नमूना लिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि सार्वजनिक सभा में दिए गए भाषण की रिकॉर्डिंग सुनाकर आवाज का नमूना लेने की आवश्यकता क्यों पड़ी?

उन्होंने निदा खान और उसके माता-पिता से मुलाकात की बात भी स्वीकार की।जलील के अनुसार, निदा ने उन्हें बताया था कि वह तीन महीने की गर्भवती है और उसे धमकी भरे फोन आ रहे हैं। उसके माता-पिता से बेटी की कीमत पूछे जाने की बात भी उसने बताई थी।

जलील ने कहा कि इस मुलाकात की जानकारी उन्होंने स्वयं पुलिस को दी थी। यदि निदा का नाम कुछ और होता, तब भी वे उसकी सहायता करते। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे जाति और धर्म देखकर किसी की मदद नहीं करते। धर्मांतरण के विरोध में उनकी और उनकी पार्टी की भूमिका स्पष्ट है।

निदा की गिरफ्तारी में देरी पर उठाए सवाल

जलील ने सवाल किया कि निदा इतने दिनों तक अपने घर में मौजूद थी, तो पुलिस ने उसे पहले गिरफ्तार क्यों नहीं किया? उनके अनुसार, इस प्रकरण को अनावश्यक रूप से राजनीतिक रूप दिया जा रहा है। उन्होंने मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि निदा मामले की रिपोर्टिंग के लिए दिल्ली से पत्रकार महाराष्ट्र राज्य पहुंचे, लेकिन स्थानीय स्तर पर दूसरे मामलों को उतनी प्राथमिकता नहीं दी गई।

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अशोक खरात प्रकरण की भी उठाई बात

उन्होंने शहर के अशोक खरात प्रकरण का उल्लेख करते हुए पूछा कि उस मामले को लेकर मीडिया में वैसी सक्रियता क्यों नहीं दिखाई गई। निदा के पिता के पुराने मकानों से बेकार लकड़ी एकत्र कर बेचने के व्यवसाय का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस पहलू पर भी समाचार माध्यमों ने पड़ताल नहीं की। जलील ने कुछ समाचार कार्यक्रमों को प्रायोजित बताते हुए मीडिया पर घटनाओं को अपनी सुविधा के अनुसार प्रस्तुत करने का आरोप लगाया।

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शिरसाट को लेकर फिर साधा निशाना

मंत्री संजय शिरसाट के जेल जाने संबंधी बयान पर पलटवार करते हुए जलील ने कहा कि उन्होंने शिरसाट के खिलाफ पहले भी कई आरोप और प्रमाण सामने रखे हैं। यदि जेल में मुलाकात हुई तो वाहन की खरीद, जमीन के सौदे, होटल के लिए धन जुटाने और निर्माण व्यवसायियों से जुड़े मामलों पर चर्चा करेंगे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जेल जाने की बात करने वाले शिरसाट को तय करना चाहिए कि वहां पहले कौन पहुंचेगा।

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तुलजापुर हत्याकांड पर भी उठाए सवाल

तुलजापुर के एक आश्रम में 19 वर्षीय युवक की हत्या और उसके मित्र पर गंभीर हमले की घटना पर भी जलील ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि मृतक का विवाह 19 तारीख को होने वाला था। घटना के वीडियो में भगवा वस्त्र पहने पुजारी दिखाई देने का उल्लेख करते हुए उन्होंने सवाल किया कि उससे पूछताछ और गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?

उन्होंने मामले में अन्य 18 लोगों की भूमिका पर कार्रवाई की मांग करते हुए मीडिया से भी पूछा कि इस घटना की पड़ताल के लिए दिल्ली से कितने पत्रकार तुलजापुर पहुंचेंगे।