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बाघों की दहाड़ vs मशीनों का शोर! WCL के विस्तार पर हाई कोर्ट का ‘ब्रेक’, क्या बंद होगी वेकोलि दुर्गापुर खदान?

WCL Durgapur Mine Expansion: वेकोलि दुर्गापुर खदान विस्तार रुकने से चंद्रपुर की अर्थव्यवस्था को ₹114 करोड़ का झटका! 1300 कर्मचारी होंगे प्रभावित। ताडोबा बफर जोन और कोयला संकट पर बढ़ी चिंता।

  • Written By: प्रिया जैस
Updated On: Feb 07, 2026 | 12:22 PM

दुर्गापुर खदान पर हाई कोर्ट का ब्रेक (सौजन्य-सोशल मीडिया)

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Coal Mining vs Wildlife: वेकोलि दुर्गापुर के विस्तारीकरण का मामला लंबे समय से लटका हुआ है। पिछले 20 वर्षों से वेकोलि दुर्गापुर ने सिनाला, मसाला और नवेगांव बस्ती को विस्थापित करने में मशक्कत की और अन्ततः सफल हुए। उसके बाद वन विभाग के 121.58 हेक्टेयर जमीन को लेने और विभिन्न प्रकार की अनुमति प्राप्त करने में जमकर पसीना बहाया।

16 दिसंबर 2015 को वन विभाग से अनुमति मिली जबकि उसके दो साल बाद 10 नवंबर 2017 को पर्यावरण विभाग की भी मंजूरी मिल गई। देर से ही सही, लेकिन वेकोलि दुर्गापुर की खदान विस्तारीकरण की प्रक्रिया सही दिशा में आगे बढ़ी। वन विभाग को पैसे देने, पर्यावरण विभाग के नियम शर्तों को पूरा करने जैसे सभी औपचारिकताएं पूरी हो ही रही थी कि मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर बेंच में एक जनहित याचिका डाल दी गई।

ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व पर मंडराया खतरा

उसमें दलील दी गई कि दुर्गापुर कोयला खदान का विस्तार 121.58 हेक्टेयर जंगल की जमीन पर किया जाएगा। इस विस्तार से ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व का कोर जोन और बफर जोन खतरे में पड़ जाएगा। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष को बढ़ावा मिलेगा। यह इलाका शेड्यूल-1 के वन्यजीव जैसे बाघ, तेंदुए आदि का घर है। पिछले कुछ सालों में बाघों ने इस इलाके में कई लोगों की जान ली है।

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इसलिए उत्तराखंड के ‘जिम कॉर्बेट व्याघ्र प्रकल्प के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा दिए गए फैसले की तरह, इस खदान का भी विस्तार रोका जाए। वेकोलि के अनुसार प्रस्तावित दुर्गापुर विस्तारित खदान कोर जोन से 12.35 किलोमीटर और बफर और पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र से 1.25 किलोमीटर दूरी पर है। इसी कारण संबंधित विभागों द्वारा खदान विस्तार के लिए मंजूरी मिल चुकी है। उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क की स्थिति और यहां की स्थिति में काफी अंतर है।

1300 लोंग होंगे प्रभावित

वेकोलि दुर्गापुर का विस्तार नही होता है तो आगामी कुछ महीनों में खदान बंद करना पड़ेगा। इससे स्थायी 800 कोयला कर्मियों को यहां से बाहर स्थानांतरित होना पड़ेगा जबकि ठेकेदारी मजदूर, चालक सहित 500 अस्थायी कर्मी बेरोजगार हो जाएंगे।

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114 करोड़ का व्यवहार

वेकोलि दुर्गापुर में कार्यरत 800 कर्मियों और अधिकारियों का महीने में लगभग 8 करोड़ रुपये जबकि ठेकेदारी कामगारों को 1।5 करोड़ रुपये का भुगतान होता है। साल में 1 अरब 14 करोड़ रुपये वेतन होता है। उन पैसों से दुर्गापुर, चन्द्रपुर के बैंकों, किराना, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, फर्नीचर सहित विभिन्न सैकड़ों दुकानों, दर्जनों स्कूलों, कॉलेजों, अपार्टमेंट, जमीनों पर खर्च होता है। अगर दुर्गापुर खदान बंद होती है तो वार्षिक एक अरब रुपये का लेनदेन प्रभावित हो जाएगा।

कोयले का विकल्प क्या?

कोयला खनिज पदार्थ है। इसे साल दो साल में पैदा नहीं किया जा सकता है। हजारों सालों की प्राकृतिक प्रक्रिया से कोयला बनता है, जो मनुष्य के हाथ में नहीं है। इस कारण प्रकृति ने जहां कोयला दिया है, वही से उसे निकलना पड़ेगा। यहां 45 वर्षों से सफलता पूर्वक कोयला निकाला जा रहा है। फिलहाल खदान का विस्तार किया जाना है।

वेकोलि ने खदान विस्तार करने के लिए जमीन अधिग्रहण से लेकर अन्य संबंधित कार्यो के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर दिये है। विस्तारित खदान चलाने के लिए वेकोलि के पास पहले से कर्मचारी, अधिकारी, मशीन, टूल्स, कार्यालय, वाहन, क्रेन, क्वार्टर्स सुचारु है। उल्लेखनीय है कि इस प्रकल्प से सिटीपीएस को कम खर्च की ढुलाई में आगामी 12 से 15 वर्षों तक कोयला उपलब्ध होते रहेगा।

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Published On: Feb 07, 2026 | 12:22 PM

Topics:  

  • Chandrapur News
  • High Court
  • Tadoba-Andhari Tiger Reserve
  • Western Coalfields

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