भटाली ओसी में भूस्खलन (सौजन्य-नवभारत)
Coal India Mining Standards: वेकोलि भटाली का 11 मार्च की आधी रात के हुए दुर्घटना में भले ही जान हानि नहीं हुई, लेकिन उक्त दुर्घटना ने वेकोलि मुख्यालय, कोल इंडिया मुख्यालय, भारत सरकार की सुरक्षा संबंधित विभाग डी जी एम एस सहित तमाम सभी विभाग के दावे को झुठला दिया है कि खदानों में तय मानक अनुसार काम होता है।
दुर्घटना के बाद से संबंधित विभाग की बड़े शहरों के बड़े अधिकारियों को खदान परिसर में आना जाना लगा हुआ है। सूत्र बताते हैं कि हर दुर्घटना के बाद सप्ताह दो सप्ताह तक खानापूर्ति वाली जांच होती है। लेकिन कार्रवाई नगण्य ही रहता है। इस बार की दुर्घटना में स्पष्ट दिख रहा है कि किसकी गलती से दुर्घटना हुई है।
संबंधित कर्मचारियों ने उपक्षेत्रीय प्रबंधक और खान प्रबंधक को दो महीने से बता रहे थें कि जहां से कोयले निकाले जा रहे हैं उसके ऊपर के शील्ड को पहले हटाया जाए। लेकिन उपक्षेत्रीय प्रबंधक और खान प्रबंधक ने पावर के जोर पर जबरदस्ती काम करवा रहे थें। नतीजा सब के सामने है। वेकोलि के एक अधिकारी व तीन कर्मचारियों मौत के मुंह से निकले हैं।
अलग-अलग विभिन्न टीमों द्वारा हफ्तों तक जांच होने के बावजूद किसी की गलतियों को पता ना चले तो ऐसी जांच का क्या मतलब रह जाता है। ऐसा लगता है कि जांच के नाम पर खानापूर्ति की जाती है। 11 तारीख की आधी रात को हुई दुर्घटना में कर्मचारियों ने अधिकारियों को दो महीने पूर्व में सूचित किया था कि दुर्घटना की संभावना है, फिर भी जबरदस्ती काम करवाया जाता रहा।
यह भी पढ़ें – 8 साल तक मरे हुए मरीज का चला इलाज! बीड बाईपास के अस्पताल का खौफनाक सच रोंगटे खड़े कर देगा
ऐसे में दोषी अधिकारियों पर उचित कार्रवाई अपेक्षित है। भटाली खदान के सब एरिया मैनेजर धोबले से मोबाइल से संपर्क कर जब यह पूछा गया कि कर्मचारियों द्वारा दुर्घटना हो सकने की संभावनाए बताए जाने के बाद भी काम क्यों जारी रखा गया तो उन्होंने कहा कि जांच में सब सामने आ जाएगा। इसके बाद मोबाइल डिस्कनेक्ट कर दिया।