नागपुर सीपी रवींद्र सिंगल (फाइल फोटो)
CP Ravinder Singal Cyber Crime: साइबर पुलिस स्टेशन में चल रही अनियमितता और खाते अनफ्रीज करवाने के लिए की जा रही वसूली की खबर को सीपी रवींद्रकुमार सिंगल ने गंभीरता से लिया। नागरिकों को अनावश्यक परेशानी न हो इसके लिए उन्होंने साइबर शिकायतों पर नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) जारी कर दी है।
इसके साथ ही डीसीपी लोहित मतानी ने साइबर पुलिस थाने के संबंधित कर्मचारियों की विभागीय जांच के भी आदेश दिए हैं। एसीपी शिंदे इस प्रकरण की जांच कर रहे हैं। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य साइबर ठगी के मामलों में खातों की अनावश्यक फ्रीजिंग पर रोक लगाना, शिकायतों का त्वरित निपटारा करना है और जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
नई एसओपी के तहत अब साइबर शिकायत मिलने के बाद स्थानीय पुलिस थाना और साइबर पुलिस थाना के बीच समन्वय बनाकर कार्रवाई की जाएगी। एनसीआरपी पोर्टल या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर प्राप्त शिकायतों पर पहले प्राथमिक जांच की जाएगी।
उसके बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। खातों को ‘होल्ड’ करने के लिए अब बीएनएसएस की धारा 168 और 94 के तहत कानूनी नोटिस देना अनिवार्य किया गया है। बिना ठोस कारण खाते फ्रीज करने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई है।
एसओपी में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि राशि जब्त करनी हो या ‘इंटरिम कस्टडी’ में लेना आवश्यक हो तो एफआईआर या ई-एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य रहेगा। साथ ही, सभी मामलों का विवरण मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल (एमआरएम) में दर्ज करना होगा, ताकि पीड़ितों को राशि वापस दिलाने की प्रक्रिया तेज हो सके।
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व्यवस्था के तहत जिले में डीसीपी स्तर के अधिकारी को शिकायत निवारण की जिम्मेदारी दी जाएगी। ‘होल्ड’ से संबंधित शिकायतों पर 15 दिनों के भीतर निर्णय लेना अनिवार्य होगा। यदि शिकायतकर्ता निर्णय से संतुष्ट नहीं है तो आगे अपील का भी प्रावधान रखा गया है।
एसओपी में यह भी प्रावधान किया गया है कि शिकायत के 90 दिनों के भीतर यदि कोई न्यायालयीन प्रक्रिया शुरू नहीं होती है तो संबंधित खाते से ‘होल्ड’ हटाया जाएगा। इससे खाताधारकों को अनावश्यक परेशानी से राहत मिलेगी। इसमें व्यापारी और ई-कॉमर्स खातों के लिए भी विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। जिन व्यापारी या ई-कॉमर्स खातों पर बार-बार शिकायतें आती हैं उन पर विशेष जांच (ईडीडी) की जाएगी और आवश्यकता अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अनावश्यक रूप से खाते फ्रीज न करें, सभी कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत करें और नागरिकों के अधिकारों का संरक्षण करते हुए पारदर्शिता बनाए रखें। इस नई एसओपी से साइबर अपराधों की जांच में तेजी आने के साथ ही आम नागरिकों को होने वाली परेशानियों में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।