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Chandrapur: ट्रेन की चपेट में आया दुर्लभ उल्लू, इसकी अनोखी खासियत उड़ा देगी होश!

Chandrapur News: चंद्रपुर जिले के बल्लारशाह-गोंदिया रेलवे ट्रैक पर आए दिन कई जंगली जानवरों के मरने की खबर सामने आ रही है। अब ट्रेन से टकराकर एक उल्लू के घायल होने की खबर सामने आई है।

  • By प्रिया जैस
Updated On: Oct 24, 2025 | 01:40 PM

हुमा उल्लू घायल (सौजन्य-नवभारत)

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Chandrapur Train Accident: बल्लारशाह-गोंदिया रेलवे ट्रैक पर कई जंगली जानवर अपनी जान गंवा रहे हैं, और अनुमान है कि लक्ष्मी का मुख्य वाहन कहे जाने वाले उल्लू को ट्रेन ने टक्कर मार दी। घटनास्थल से हैबिटेट कंजर्वेशन सोसाइटी के अध्यक्ष दिनेश खाटे को सूचना मिली कि रेलवे ट्रैक पर एक बड़ा उल्लू घायल और बेचैन पड़ा है।

तुरंत घटनास्थल पर पहुँचकर, जब घायल उल्लू की जाँच की गई, तो वह उल्लू दुर्लभ हुमा उल्लू प्रजाति का था, जो हमारे क्षेत्र में बहुत कम पाया जाता है, अंग्रेजी में इसे डस्की ईगल उल्लू कहते हैं। सदस्यों का कहना है कि हुमा उल्लू बहुत कम दिखाई देते हैं, ताड़ोबा में इसके केवल एक बार देखे जाने का रिकॉर्ड है, और हैबिटेट कंजर्वेशन सोसाइटी के अध्यक्ष दिनेश खाटे का मानना ​​है कि पेंच टाइगर रिजर्व में भी यह बहुत कम पाया जाता है।

स्लेटी रंग का होता है हुमा उल्लू

हुमा उल्लू का मुख्य रंग धुएँ के रंग का स्लेटी होता है और इसकी आँखें बड़ी, पीली होती हैं। जब हुमा उल्लू बैठता है, तो उसके सिर पर लगे पंख ऊपर उठकर सींगों की तरह आपस में जुड़ जाते हैं। हुमा उल्लू एक बड़ा उल्लू है जिसके सींग और पंख होते हैं और यह लगभग 58 सेमी (23 इंच) लंबा होता है।

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हुमा उल्लू का निवास स्थान यह पक्षी भारत में हर जगह पाया जाता है, खासकर पठारी इलाकों में, मानव बस्तियों के पास, पानी के पास, और पुराने इमली के पेड़ों में रहना पसंद करता है। एक बार हुमा उल्लू जोड़ा बना लेने के बाद कई वर्षों तक एक ही जगह पर रहता है। नवंबर से अप्रैल हुमा उल्लू का प्रजनन काल होता है और मादा एक बार में 2 से 3 सफेद अंडे देती है।

ऐसे बनाते है घोसला

हुमा उल्लू आमतौर पर पानी के पास ऊंचे पेड़ों पर कांटेदार लकड़ियों की मदद से अपना घोंसला बनाते हैं। छोटे स्तनधारी, पक्षी, छिपकलियां और बड़े कीड़े हुमा उल्लू का मुख्य भोजन हैं। घायल हुमा उल्लू को इलाज के लिए ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर में भर्ती कराया गया। पशु चिकित्सा अधिकारी कुंदन पोडशेलवार ने उसका इलाज शुरू किया और उसे अपनी निगरानी में रखा।

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पक्षी की चोंच पर घाव के कारण खून बह रहा था। उसके बाएं पंख पर भी घाव पाया गया और वहां से भी खून बह रहा था। घटना की सूचना वन विकास निगम के वनरक्षक स्वामी को दी गई। हैबिटेट कंजर्वेशन सोसाइटी के अमित देशमुख, अंकित बाकड़े, रोहित बेलसरे और नाज़िश अली घटनास्थल पर मौजूद थे।

Rare species of huma owl injured hit by train know its specialities

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Published On: Oct 24, 2025 | 01:40 PM

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