Chandrapur: ब्रह्मपुरी में विरोध प्रदर्शन-जन सुरक्षा विधेयक की प्रतीकात्मक होली

Public Safety Bill: जन सुरक्षा विधेयक विरोधी संघर्ष समिति, ब्रह्मपुरी की ओर से छत्रपति शिवाजी महाराज चौक पर विरोध प्रदर्शन किया गया। इस वक्त जन सुरक्षा विधेयक की प्रतीकात्मक होली की गई
ब्रह्मपुरी में विरोध प्रदर्शन
ब्रह्मपुरी में विरोध प्रदर्शन (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Published on: 
Updated on: 

Chandrapur News: जन सुरक्षा विधेयक विरोधी संघर्ष समिति, ब्रह्मपुरी ने 25 जुलाई को छत्रपति शिवाजी महाराज चौक पर जन सुरक्षा विधेयक के विरोध में धरना दिया, जो लोगों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन है। इस धरना प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पत्रकार, वकील, शिक्षक, नियोजन कर्मचारी, किसान, युवा और बहुजन समाज के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। जन सुरक्षा विधेयक विरोधी संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि जन सुरक्षा विधेयक लोगों की सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि शासकों के फायदे के लिए है।

इस कानून ने सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले किसी भी व्यक्ति को अर्बन नक्सल करार दिए जाने का खतरा पैदा कर दिया है। चूंकि इस विधेयक में इस शब्द की कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं है, इसलिए मांग करने वाले शिक्षक, अपनी राय व्यक्त करने वाले वकील, सच लिखने वाले पत्रकार, मार्च निकालने वाले किसान और मज़दूर भी देशद्रोही करार दिए जा सकते हैं। इसलिए प्रदर्शनकारियों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह कानून लोकतंत्र-विरोधी, भयावह और जन-विरोधी है।

एकजुट होने की अपील

इस समय कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. प्रेमलाल मेश्राम, विनोद ज़ोडगे, लीलाधर वंजारी, जगदीश पिलारे, संतोष रामटेके, जीवन बागड़े, मिलिंद रंगारी, सुधाकर पोपटे, संजय वालके, डॉ. महेश कोपुलवार, स्वप्निल राऊत, राजेश माटे, प्रभु लोखंडे, डीएम रामटेके, डेविड शेंडे, हरिश्चंद्र चोले, आरबी मेश्राम, वर्षा घुमे, प्रतिभा डांगे और अन्य सामाजिक रूप से जागरूक नेताओं ने लोगों का मार्गदर्शन करते हुए उन्हें एकजुट होने की अपील की।

जनसुरक्षा नहीं, जनविरोधी कानून!

इसके बाद बिल पर प्रतीकात्मक होली खेली गई और “इसे कैसे नहीं हटाया जा सकता, इसे हटाए बिना नहीं रह सकता!”, “जनसुरक्षा नहीं, जनविरोधी कानून!” जैसे नारे इलाके में गूंज उठे। प्रदर्शन के बाद, उप-विभागीय अधिकारी और तहसीलदार के माध्यम से माननीय राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा गया। साथ ही, 8 अगस्त को शहीद स्मारक से तहसील कार्यालय तक एक विशाल मार्च निकाला जाएगा, जिसमें सभी सामाजिक संगठनों से भाग लेने की अपील की गई है। प्रदर्शन में इस विधेयक के निरस्त होने तक चैन से न बैठने का संकल्प स्पष्ट दिखाई दिया।

हर जिले में जलाई जा रही प्रतीकात्मक “काले कानून” की प्रतियां

बता दें कि महाराष्ट्र विशेष सार्वजनिक सुरक्षा विधेयक, जिसे जन सुरक्षा विधेयक के रूप में जाना जाता है , को विधानमंडल द्वारा मंजूरी दिए जाने के कुछ दिनों बाद, कांग्रेस और विपक्ष ने एक बड़े विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई है और राज्य के हर जिले में प्रतीकात्मक रूप से “काले कानून” की प्रतियां जलाई जा रही है।

हर्षवर्धन सपकाल ने क्या कहा

यह आरोप लगाते हुए कि नया कानून सरकार और उसके पसंदीदा उद्योगपतियों के लाभ के लिए बनाया गया है, महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि "इस कानून का एकमात्र लाभार्थी सरकार और इसका समर्थन करने वाले उद्योगपति होंगे जिन्होंने धारावी में जमीन हड़पी है, सुरजागढ़ में खनिज संसाधनों को लूटा है, और शक्तिपीठ गलियारे तक रेड-कार्पेट पहुंच चाहते हैं, वे ही लाभान्वित होंगे।"

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com