

Mahatma Jyotiba Phule Memorial Beautification: चंद्रपुर जिले के महात्मा ज्योतिबा फुले स्मारक के सौंदर्यीकरण को लेकर पिछले कई महीनों से जारी गतिरोध आखिरकार समाप्त हो गया। प्रशासन की ओर से शुक्रवार को सौंदर्यीकरण कार्य का शुभारंभ कर दिया गया। इससे फुले विचारधारा के समर्थकों के साथ ही शहरवासियों ने भी राहत की सांस ली।
मुख्याधिकारी और आंदोलनकारी नेताओं के बीच हुई सार्थक चर्चा के बाद माना जा रहा था कि स्मारक के सौंदर्यीकरण कार्य में आ रही बाधाएं दूर हो गई हैं। हालांकि, लेआउट डालने पहुंचे अधिकारियों को कथित रूप से एक सभापति की ओर से आपत्ति एवं डांट-फटकार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद अधिकारी बिना लेआउट डाले ही वापस लौट गए। इस घटनाक्रम को लेकर शहर में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। इस बीच, भारतीय जनता पार्टी के शहर अध्यक्ष प्रविण मोहुर्ले ने मुख्याधिकारी, सार्वजनिक निर्माण विभाग, जिलाधिकारी तथा सुधीर मुनगंटीवार को पत्र सौंपकर सौंदर्यीकरण कार्य तत्काल शुरू करने की मांग की। पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी गई कि शुक्रवार तक काम शुरू नहीं हुआ तो सोमवार से अंतिम चरण का आंदोलन किया जाएगा।
आंदोलन की चेतावनी के बाद प्रशासन ने सक्रियता दिखाई और शुक्रवार को ही सौंदर्यीकरण कार्य शुरू कर दिया। लंबे समय से लंबित काम शुरू होने के बाद फुले समर्थकों एवं शहरवासियों में संतोष व्यक्त किया जा रहा है।
भाजपा के प्रविण मोहुर्ले, मोती टहलयानी एवं किरण कापगते ने इस कार्य के लिए सांसद सुधीर मुनगंटीवार, थानेदार राठौड़, नगर परिषद के मुख्याधिकारी, नगर परिषद अभियंता, बी एंड सी विभाग के अभियंता तथा आंदोलन में सहभागी महिला-पुरुषों के प्रति आभार व्यक्त किया।
फुले स्मारक के सौंदर्यीकरण का काम निधि उपलब्ध होने के करीब नौ माह बाद शुरू होने से इस पूरे प्रकरण को लेकर शहर में लगातार चर्चा होती रही। अब कार्य शुरू होने के बाद नगर परिषद स्तर पर चल रहा यह विवादास्पद मुद्दा समाप्त होने की उम्मीद जताई जा रही है। राजनीतिक हलकों में भी इस घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। जानकारों का मानना है कि फुले स्मारक सौंदर्यीकरण प्रकरण का स्थानीय राजनीति पर भी असर पड़ा है। हालांकि, इस पूरे मामले में संबंधित सभी पक्षों की भूमिका और उनके दावों को लेकर स्थिति स्पष्ट होना अभी बाकी है। बहरहाल, नौ महीने की प्रतीक्षा के बाद फुले स्मारक के सौंदर्यीकरण कार्य को गति मिलने से फुले समर्थकों के साथ ही मूल शहर की जनता ने भी राहत की सांस ली है।