इरई नदी (सौजन्य-नवभारत)
Irai Bachao Janandolan: चंद्रपुर शहर की जीवनदायिनी इरई नदी आज भी अधूरे गहरीकरण के कारण मरणासन्न स्थिति में है। नदी में गाद जमने से इसका तल उथला हो गया है। नदी के पुनरुद्धार के लिए प्रशासन ने वर्ष 2015 में पहली बार गहरीकरण अभियान शुरू किया था। पिछले 11 वर्षों में यह अभियान पांच बार चलाया जा चुका है और करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन अब तक नदी का समुचित गहरीकरण नहीं हो सका है।
अब एक बार फिर महानगरपालिका और जिला प्रशासन छठे चरण में गहरीकरण अभियान शुरू करने की तैयारी में है। ऐसे में चंद्रपुरवासियों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या इस बार सच में इरई नदी का पुनरुद्धार हो पाएगा? इरई नदी चंद्रपुर शहर के समानांतर लगभग 9 किलोमीटर तक बहती है और आगे 17 किलोमीटर दूरी पर वर्धा नदी में मिलती है।
चंद्रपुर महाऔष्णिक विद्युत केंद्र और वेकोलि की खदानों से निकले ओवरबर्डन के कारण नदी का तल उथला हो गया है। नदी के भीतर झाड़ियां और वनस्पति भी बड़ी मात्रा में उग आई हैं। हर बार गहरीकरण का काम देर से शुरू होने के कारण प्री-मानसून के साथ काम ठप हो जाता है। वर्ष 2025 में भी यही स्थिति बनी रही और पूरा अभियान अधूरा रह गया। अब नागरिकों में यह चर्चा है कि क्या इस बार भी वही हालात दोहराए जाएंगे।
इरई बचाव जनआंदोलन के कुशाब कायरकर ने नदी के संवर्धन और पुनरुद्धार के लिए लगातार प्रशासन से मांग की थी। 20 मई 2015 को तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ. दीपक म्हैसेकर और निवासी उपजिलाधिकारी चंद्रभान पराते की पहल पर काम शुरू हुआ, लेकिन कुछ ही दिनों में यह काम बंद कर दिया गया।
9 अप्रैल 2016 को दोबारा काम शुरू हुआ, जिसमें वेकोलि ने 5 करोड़ 41 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी।बावजूद इसके केवल 100 फीट चौड़ीकरण के बाद निधि समाप्त होने का हवाला देकर काम रोक दिया गया। 4 अप्रैल 2022 को तीसरी बार अभियान शुरू हुआ, जो महज 15 दिनों में बंद हो गया।
5 मार्च 2023 को चौथी बार काम शुरू किया गया, लेकिन इसमें सिर्फ झाड़ियां हटाकर गहरीकरण का दिखावा करने के आरोप लगे। उच्च न्यायालय के निर्देश पर 25 अप्रैल 2025 को पांचवीं बार अभियान शुरू किया गया। इसे 45 दिन तक चलाने की घोषणा की गई थी, लेकिन प्री-मानसून बारिश के कारण यह भी अधूरा रह गया। निर्धारित 17 किलोमीटर क्षेत्र का गहरीकरण नहीं हो सका।
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जिलाधिकारी विनय गौड़ा ने कहा कि इरई नदी का गहरीकरण सभी के लिए महत्वपूर्ण विषय है। इस वर्ष काम जल्दी शुरू किया जाएगा। महानगरपालिका द्वारा टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और अगले दो सप्ताह में काम शुरू होने की संभावना है।
इरई बचाव जनआंदोलन के कुशाब कायरकर ने आरोप लगाया कि पिछले वर्ष पांचवें चरण में केवल 2.70 किलोमीटर क्षेत्र में ही काम हुआ। नदी को 300 फीट चौड़ा और 5 फीट गहरा करने का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका, जो प्रशासन की विफलता को दर्शाता है। अब देखना यह है कि छठा अभियान इरई नदी के पुनरुद्धार में कितना सफल होता है।