गोंडपिपरी में सूखे की मार, फार्मर आईडी के बावजूद सातबारा क्यों जरूरी? किसानों पर बढ़ा खर्च

Chandrapur Farmers: चंद्रपुर के गोंडपिपरी में सूखे से प्रभावित किसान आर्थिक सहायता का इंतजार कर रहे हैं। किसानों ने फार्मर आईडी के बावजूद सातबारा अनिवार्य करने की शर्त सरल करने की मांग की है।
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गोंडपिपरी किसान (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Chandrapur Drought: पिछड़े तहसील के रूप में पहचाने जाने वाले गोंडपिपरी तहसील में इस वर्ष सूखे की स्थिति को देखते हुए तहसील को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। बारिश की कमी और फसलों को समय पर पानी नहीं मिलने से कई क्षेत्रों में कृषि फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है। ऐसे में शासन से मिलने वाली आर्थिक सहायता की प्रतीक्षा कर रहे किसानों के सामने अब राहत प्राप्त करने के लिए आवश्यक दस्तावेजों की प्रक्रिया भी परेशानी का कारण बन रही है।

किसानों के अनुसार, अकाल राहत के लिए सातबारा उतारा, आधार कार्ड, फार्मर आईडी और बैंक पासबुक जैसे दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। उनका सवाल है कि जब शासन की डिजिटल व्यवस्था में फार्मर आईडी के माध्यम से किसान की जमीन, फसल, आधार सहित आवश्यक जानकारी उपलब्ध है, तो बार-बार सातबारा उतारा प्रस्तुत करने की आवश्यकता क्यों है?

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अतिरिक्त आर्थिक बोझ

किसानों का कहना है कि वर्तमान में एक सातबारा उतारा निकालने के लिए करीब 40 से 50 रुपए तक खर्च करना पड़ता है। यदि एक-दो एकड़ जमीन वाले किसान से लेकर अधिक जमीन वाले प्रत्येक किसान को अलग-अलग सातबारा निकालना पड़े, तो दुष्काल की स्थिति में यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन जाता है।

अकाल के कारण पहले ही ऐसे में सरकारी सहायता प्राप्त करने के लिए ही अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ना परेशानी बढ़ाने वाला है। राजस्व खेती से होने वाली आय प्रभावित हुई है। विभाग के पास जमीन का पंजीयन, खातेदारों की जानकारी और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड पहले से उपलब्ध हैं। फार्मर आईडी में भी संबंधित किसान की आवश्यक जानकारी दर्ज रहती है। इसलिए उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर पात्र किसानों का सत्यापन किया जा सकता है।

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पंचनामे से पहले तत्काल राहत की मांग

तहसील के अनेक गांवों में फसलों को नुकसान होने की स्थिति में प्रत्येक किसान के खेत का अलग-अलग पंचनामा कर उसके बाद सहायता देने की प्रक्रिया में समय लग सकता है। इसलिए अकालग्रस्त स्थिति को देखते हुए पात्र किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता देने की मांग जोर पकड़ रही है।

सीधे खाते में सहायता की अपेक्षा

यदि फार्मर आईडी और अन्य डिजिटल सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर पात्र लाभार्थियों की पहचान की जा सकती है, तो सातबारा उतारा अनिवार्य करने की शर्त में शिथिलता दी जानी चाहिए। विशेष रूप से आर्थिक संकट से जूझ रहे किसानों से सहायता प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त खर्च कराने के बजाय प्रक्रिया को सरल बनाकर सीधे आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।

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